जन्मकुंडली विश्लेषण
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कुंडली तीन शैलियों में देखी जा सकती है — पूर्व भारतीय (बंगाल की प्रचलित, राशि स्थिर), उत्तर भारतीय (भाव स्थिर, लग्न ऊपर-बीच में) और दक्षिण भारतीय चार्ट; उन्नत सेटिंग में या परिणाम के ऊपर एक स्पर्श में बदलें।
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राशिचक्र एवं नवांश चार्ट
लग्न, चंद्र राशि, सूर्य राशि सहित संपूर्ण राशिचक्र एवं नवांश चार्ट। नवग्रहों की भाव स्थिति एवं दृष्टि विचार।
जन्म नक्षत्र एवं पाद विचार
27 नक्षत्रों में जन्म नक्षत्र, चरण, नक्षत्राधिपति एवं नक्षत्र-आधारित स्वभाव विश्लेषण।
विंशोत्तरी दशा एवं दशाफल
महादशा, अंतर्दशा एवं प्रत्यंतर्दशा — किस समय किस ग्रह का प्रभाव चल रहा है, सही दिनांक सहित।
विशेष योग विचार
राजयोग, धनयोग, गजकेसरी, केमद्रुम सहित कुंडली के महत्वपूर्ण वैदिक योगों का विश्लेषण।
पंचांग एवं ग्रह गोचर
जन्म की तिथि, नक्षत्र, योग, करण एवं वर्तमान ग्रह गोचर — चंद्र राशि से फलादेश।
विस्तृत फलादेश
स्वास्थ्य, कर्मजीवन, विवाह, संतान एवं आर्थिक विचार — प्रत्येक ग्रह की भाव-स्थिति के अनुसार।
कुंडली मिलान एवं विशेषज्ञ परामर्श
कुंडली गणना के बाद कुंडली मिलान करें — अष्टकूट पद्धति से विवाह योग्यता का विचार।
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वैदिक जन्मकुंडली — विस्तृत जानकारी
12 लग्नों का संक्षिप्त स्वभाव एवं विशेषताएँ
वैदिक ज्योतिष में लग्न (Ascendant) वह राशि है जो जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उदित होती है। यह व्यक्ति की शारीरिक बनावट, स्वभाव एवं जीवन-दृष्टि निर्धारित करती है। VSOP87 ग्रह-गणना एवं लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश के प्रयोग से हमारी कुंडली गणना प्रत्येक लग्न को सटीक रूप से पहचानती है।
साहसी, उद्यमी, नेतृत्वप्रिय। मंगल लग्नाधिपति। शीघ्र निर्णय लेने की क्षमता, परंतु अधीर प्रकृति।
धैर्यशील, स्थिर, भोगप्रिय। शुक्र लग्नाधिपति। संपत्ति संचय में दक्ष, कलाप्रेमी स्वभाव।
बुद्धिमान, संवाद में दक्ष, बहुमुखी। बुध लग्नाधिपति। लेखन, वक्तृत्व एवं व्यापार में निपुण।
भावुक, मातृभक्त, गृहप्रिय। चंद्र लग्नाधिपति। परिवार का अत्यंत ध्यान रखने वाला स्वभाव।
आत्मविश्वासी, उदार, नेतृत्वप्रिय। सूर्य लग्नाधिपति। राजनीति एवं प्रशासन में सफलता।
विश्लेषणात्मक, परिश्रमी, विवेकी। बुध लग्नाधिपति। चिकित्सा एवं लेखा-विज्ञान में दक्ष।
न्यायप्रिय, कूटनीतिक, सौंदर्यप्रेमी। शुक्र लग्नाधिपति। संबंधों एवं कला में सफलता।
तीक्ष्ण बुद्धि, शोधप्रिय, रहस्यमय। मंगल लग्नाधिपति। गुप्त विषयों में अंतर्दृष्टि।
आदर्शवादी, दार्शनिक, भ्रमणप्रिय। बृहस्पति लग्नाधिपति। धर्म एवं उच्च शिक्षा में रुचि।
महत्वाकांक्षी, अनुशासित, कर्मठ। शनि लग्नाधिपति। व्यापार एवं प्रशासन में धीमी परंतु स्थायी सफलता।
मानवतावादी, नवाचारी, स्वतंत्रचेता। शनि लग्नाधिपति। समाजसेवा एवं तकनीक में रुचि।
आध्यात्मिक, संवेदनशील, कल्पनाशील। बृहस्पति लग्नाधिपति। कला एवं अध्यात्म में विशेष क्षमता।
विंशोत्तरी दशा — 120 वर्षों की संपूर्ण महादशा सारणी
विंशोत्तरी दशा पद्धति वैदिक ज्योतिष की सर्वाधिक प्रचलित दशा पद्धति है। कुल 120 वर्षों में 9 ग्रहों की महादशा आवर्तित होती है। जन्म नक्षत्र के शेष भाग से दशा निर्धारित होती है।
| ग्रह (दशेश) | महादशा (वर्ष) | जन्म नक्षत्र | मुख्य फलादेश |
|---|---|---|---|
| सूर्य ☀️ | 6 | कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा | सरकारी सफलता, पितृसुख, नेतृत्व |
| चंद्र 🌙 | 10 | रोहिणी, हस्त, श्रवण | मातृसुख, मानसिक शांति, लोकप्रियता |
| मंगल ♂️ | 7 | मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा | साहस, भूमि-संपत्ति, भाई-बहन |
| राहु ☊ | 18 | आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा | विदेश, तकनीक, आकस्मिक परिवर्तन |
| बृहस्पति ♃ | 16 | पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपद | ज्ञान, धर्म, संतान, गुरुकृपा |
| शनि ♄ | 19 | पुष्य, अनुराधा, उत्तरा भाद्रपद | कर्म, अनुशासन, विलंबित फल |
| बुध ☿ | 17 | आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती | बुद्धि, व्यापार, संवाद, पढ़ाई |
| केतु ☋ | 7 | अश्विनी, मघा, मूल | आध्यात्मिकता, विच्छेद, मोक्ष |
| शुक्र ♀️ | 20 | भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा | प्रेम, विवाह, संपत्ति, सौंदर्य |
| कुल = 120 वर्ष · जन्म नक्षत्र के अनुसार दशा का क्रम निर्धारित होता है | |||
नवग्रह एवं 12 भावों का संबंध — वैदिक ज्योतिष का मूल आधार
वैदिक ज्योतिष में 12 भाव जीवन के 12 क्षेत्रों को दर्शाते हैं। किस भाव में कौन-सा ग्रह है और कौन दृष्टि डाल रहा है — इसी आधार पर फलादेश निर्धारित होता है।
शरीर, स्वभाव, व्यक्तित्व, जीवन का समग्र स्वरूप
धन, परिवार, वाणी, भोजन, नेत्र
भाई-बहन, साहस, छोटी यात्रा, संवाद
माता, गृह, सुख, भूमि, शिक्षा, वाहन
संतान, बुद्धि, प्रेम, पूर्वजन्म का पुण्य
शत्रु, रोग, ऋण, सेवा, दैनंदिन कार्य
विवाह, दांपत्य, व्यावसायिक साझेदार
आयु, मृत्यु, गुप्त विद्या, उत्तराधिकार
भाग्य, धर्म, पिता, गुरु, लंबी यात्रा
पेशा, सम्मान, सरकार, सामाजिक प्रतिष्ठा
आय, मित्र, बड़ा भाई, आकांक्षा की पूर्ति
व्यय, विदेश, मोक्ष, अस्पताल, निद्रा
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