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कुंडली कैसे पढ़ें — एक नमूना जन्म कुंडली रिपोर्ट, चरण दर चरण

कुंडली देखना सबसे आसानी से सीखा जाता है एक असली रिपोर्ट सामने रखकर। इस पेज पर MyAstrology की एक पूरी कुंडली रिपोर्ट के मुख्य हिस्से हैं, और हर हिस्से से पहले लिखा है कि उसे कैसे पढ़ें।

⚠️ जातक काल्पनिक है — 15 जनवरी 1990, सुबह 10:30, कोलकाता। यह नमूना उसी गणना-इंजन से बना है जिससे MyAstrology की हर कुंडली और PDF रिपोर्ट बनती है — इसलिए आपकी अपनी कुंडली भी ठीक ऐसी ही दिखेगी। इस जातक की पूरी रिपोर्ट 78 पेज की है; यहाँ उसके आठ हिस्से हैं। (नमूना बना: 18 अक्टूबर 2026)

अपनी कुंडली देखें — मुफ़्तनमूना PDF खोलें
इस पेज पर
  1. जन्म विवरण: सबकी नींव
  2. लग्न, चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र
  3. लग्न चक्र और नवांश चक्र (जन्म कुंडली)
  4. ग्रह स्पष्ट (ग्रहों की स्थिति)
  5. ग्रहों का भाव फल
  6. मांगलिक और कालसर्प दोष
  7. कुंडली के योग
  8. विंशोत्तरी दशा: फल कब मिलेगा
  9. रत्न सुझाव: किस ग्रह का कौन सा रत्न
  10. पूरी रिपोर्ट में और क्या है
  11. इस रिपोर्ट के पीछे का सॉफ़्टवेयर
  12. प्रश्नोत्तर

चरण 1 — जन्म विवरण: सबकी नींव

कुंडली की पहली शर्त है सही जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान। लग्न औसतन लगभग दो घंटे में एक राशि पार करता है, इसलिए कुछ मिनट की गलती से भी लग्न या भाव बदल सकते हैं। स्थान से अक्षांश-देशांतर मिलते हैं, और उस दिन वहाँ सचमुच चलने वाली घड़ी (टाइम ज़ोन)।

नमूना जातक: 15 जनवरी 1990, सुबह 10:30, कोलकाता।

चरण 2 — लग्न, चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र

हर कुंडली की तीन मूल पहचान —

  • लग्न: जन्म के क्षण पूर्वी क्षितिज पर उदित राशि। यही कुंडली का पहला भाव है — इसीलिए जन्म समय इतना ज़रूरी है।
  • चंद्र राशि: जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में हो। आम बोलचाल में "मेरी राशि" यही है, और राशिफल व गोचर इसी से पढ़े जाते हैं।
  • जन्म नक्षत्र: चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो। विंशोत्तरी दशा यहीं से शुरू होती है, और नामकरण का पहला अक्षर इसी नक्षत्र के चरण से आता है।
★ लग्न एवं जन्म विवरण सारांश
लग्न राशि
मीन
चंद्र राशि
सिंह
जन्म नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी

चरण 3 — लग्न चक्र और नवांश चक्र (जन्म कुंडली)

यह उत्तर भारतीय कुंडली है। इसमें भाव स्थिर रहते हैं: ऊपर बीच का हीरा हमेशा पहला भाव (लग्न) है, और वहाँ से भाव घड़ी की उल्टी दिशा में चलते हैं — उसके ऊपर-बाएँ का त्रिकोण दूसरा भाव, और इसी तरह आगे। हर भाव में लिखी संख्या वहाँ की राशि है (1 = मेष … 12 = मीन); नमूने में पहले भाव में 12 है, इसलिए लग्न मीन है।

ग्रह के नाम के पास की छोटी संख्या उस नक्षत्र का क्रमांक है जिसमें ग्रह है (अश्विनी 1 … रेवती 27), और छोटा ᴿ चिह्न वक्री ग्रह दिखाता है।

दूसरा चक्र, नवांश (D-9), हर राशि को नौ भागों में बाँटता है; रिपोर्ट में इसका उपयोग विवाह और भाग्य के विचार में होता है। नमूने के नीचे यही कुंडली बाकी दो शैलियों में दी गई है।

राशि 121234567891011लग्नबृह6ᴿकेतु9चंद्र11मंग18बुध20ᴿशनि20रवि21शुक्र21ᴿराहु23
नवांश 891011121234567लग्नशनिबृहरवि★मंगकेतुशुक्रराहुबुधचंद्र

एक ही कुंडली, तीन शैलियों में

MyAstrology की कुंडली, कुंडली मिलान, प्रश्न और वर्षफल में कुंडली तीन शैलियों में दिखती है — पूर्व भारतीय (बांग्ला), उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय। पेज पर जो शैली चुनेंगे, PDF भी उसी में छपेगी। ऊपर उत्तर भारतीय है; नीचे उसी जातक का लग्न चक्र बाकी दो शैलियों में:

राशिचक्र बृह6ᴿकेतु9चंद्र11मंग18बुध20ᴿशनि20रवि21शुक्र21ᴿराहु23लग्न
पूर्व भारतीय — राशियाँ स्थिर: ऊपर बीच में मेष, फिर घड़ी की उल्टी दिशा में; कोने के खाने तिरछी रेखा से दो भागों में
राशिचक्र मेषवृषभमिथुनकर्कसिंहकन्यातुलावृश्चिकधनुमकरकुंभमीनबृह6ᴿकेतु9चंद्र11मंग18बुध20ᴿशनि20रवि21शुक्र21ᴿराहु23लग्न
दक्षिण भारतीय — राशियाँ स्थिर: ऊपर बाएँ मीन, फिर घड़ी की दिशा में मेष, वृष …; बीच का भाग खाली

चरण 4 — ग्रह स्पष्ट (ग्रहों की स्थिति)

कुंडली के पीछे की असली संख्याएँ इस सारणी में हैं: कौन ग्रह किस राशि के कितने अंश पर, किस नक्षत्र के किस चरण में। कुंडली में दो ग्रह एक भाव में दिखें तो वे कितने पास हैं, यह यहीं से पता चलता है। गणना लाहिड़ी अयनांश (निरयन) में।

ग्रहों की स्थिति

ग्रहराशिअंशनक्षत्र (पद)भाव
लग्न मीन 16°33'46" उत्तरा भाद्रपद 4था पाद 1
सूर्य मकर 1°03'33" उत्तराषाढ़ा 2रा पाद 11
चंद्र सिंह 20°07'11" पूर्वा फाल्गुनी 3रा पाद 6
मंगल वृश्चिक 25°58'48" ज्येष्ठा 3रा पाद 9
बुधR धनु 17°49'54" पूर्वाषाढ़ा 2रा पाद 10
बृहस्पतिR मिथुन 9°40'44" आर्द्रा 1वाँ पाद 4
शुक्रR मकर 7°08'15" उत्तराषाढ़ा 4था पाद 11
शनि धनु 23°33'31" पूर्वाषाढ़ा 4था पाद 10
राहु मकर 23°59'03" धनिष्ठा 1वाँ पाद 11
केतु कर्क 23°59'03" आश्लेषा 3रा पाद 5

चरण 5 — ग्रहों का भाव फल

कुंडली पढ़ने का मूल काम: कौन ग्रह किस भाव में है और उसका फल क्या है। बारह भावों के मुख्य विषय —

  • 1 शरीर, स्वभाव
  • 2 धन, परिवार, वाणी
  • 3 साहस, भाई-बहन
  • 4 माता, घर, सुख
  • 5 विद्या, संतान
  • 6 शत्रु, ऋण, मुकदमा
  • 7 विवाह, साझेदार
  • 8 आयु, गुप्त विषय
  • 9 भाग्य, धर्म, पिता
  • 10 कर्म, पेशा
  • 11 लाभ, आय
  • 12 व्यय, मोक्ष

नीचे नमूना जातक के हर ग्रह का भाव फल, जैसा रिपोर्ट में छपता है।

ग्रहों का भाव फलादेश

सूर्य — मकर (भाव चलित 10 · राशि-भाव 11)
आपके दशम भाव में सूर्य अपने ही तेज से दीप्यमान हैं। दशम भाव कर्म का स्थान है और सूर्य के दिग्बल का स्थान (दक्षिण दिशा)। इस दिग्बल के कारण सूर्य यहाँ सर्वाधिक शक्तिशाली होकर आपको एक उत्कृष्ट कर्मयोग प्रदान करते हैं। इस स्थिति से आप अत्यंत परिश्रमी, महत्वाकांक्षी एवं दायित्वशील होंगे। आपमें एक सहज नेतृत्व का गुण है, जो आपको कार्यक्षेत्र में शीघ्र उन्नति करने में सहायता करेगा। आप सरकारी सेवा, प्रशासन अथवा राजनीति में सफलता पा सकते हैं। आप पर किसी बड़ी परियोजना का दायित्व आ सकता है, और आप अपनी योग्यता से उसे सफलतापूर्वक पूर्ण करेंगे। किंतु एक बात स्मरण रखें—आपकी सफलता आपके अहंकार का कारण न बने। विनम्र रहकर सबके साथ सहयोग करते चलें, आपका कर्मजीवन आकाश छूती सफलता से भर उठेगा।
चंद्र — सिंह (6वाँ भाव)
आपके षष्ठ भाव में चंद्रमा उपस्थित हैं। षष्ठ भाव शत्रु, ऋण एवं रोग का स्थान है। चंद्रमा की यह स्थिति कुछ चुनौतीपूर्ण है। आपके मन में अकारण चिंता एवं भय काम कर सकता है। आप सहज ही मानसिक दबाव से पीड़ित हो सकते हैं। पेट के रोग, पाचन की गड़बड़ी अथवा जलजनित रोग आपके प्रमुख शत्रु हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र में दक्षता होते हुए भी आपका संवेदनशील मन कई बार सहकर्मियों के साथ तालमेल बिठाने में कष्ट पाता है। किंतु चंद्रमा यहाँ आपके लिए एक चेतावनी लेकर आए हैं—अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और अत्यधिक चिंता से बचें। नियमित योगाभ्यास अथवा ध्यान आपकी मानसिक प्रशांति लौटा सकता है।
मंगल — वृश्चिक (9वाँ भाव)
आपके नवम भाव में मंगल ने आपके भाग्य एवं धर्म को तेजस्वी बना दिया है। नवम भाव भाग्य, धर्म, पिता एवं उच्च शिक्षा का स्थान है। इस स्थिति से आपकी आस्था दृढ़ होगी और आप अपने धर्म एवं आदर्श के लिए लड़ने को तत्पर रहेंगे। आपका भाग्य अच्छा है और आप अपने ही पराक्रम से जीवन में उन्नति करेंगे। पिता शक्तिशाली एवं प्रभावशाली व्यक्तित्व के होंगे। किंतु आपकी धार्मिक आस्था इतनी प्रबल हो सकती है कि आप दूसरों के धर्म अथवा मत का सहज सम्मान न करना चाहें। स्मरण रखें, यदि सभी मार्ग एक ही ईश्वर तक जाते हैं, तो 'मेरा ही मार्ग एकमात्र सही है' — यह भाव त्याग दें। भिन्न मत के प्रति श्रद्धाशील बनें।
बुध — धनु (10वाँ भाव)
आपके दशम भाव में बुध ने आपके कर्मजीवन में एक अनन्य प्रतिभा का संचार किया है। दशम भाव कर्म का स्थान है। इस स्थिति से आप बुद्धि, ज्ञान एवं संवाद के माध्यम से ही अपना करियर गढ़ेंगे। लेखक, पत्रकार, शिक्षक, अधिवक्ता, व्यवसायी, आईटी विशेषज्ञ अथवा कूटनीतिज्ञ के रूप में आपको विशेष सफलता मिलेगी। कार्यक्षेत्र में अपनी बुद्धि की तीक्ष्णता एवं तत्काल वक्तृत्व क्षमता के लिए आप जाने जाएँगे। आप जो भी कार्य करें, आपकी शैली कुछ स्मार्ट एवं चतुर होगी। किंतु एक बात से सावधान रहें — आप एक साथ अनेक कार्य हाथ में ले सकते हैं, जिससे कोई भी पूर्ण नहीं कर पाएँगे। स्मरण रखें, एक सुसंगठित करियर गढ़ने के लिए एकाग्रता आवश्यक है।
बृहस्पति — मिथुन (4वाँ भाव)
आपके चतुर्थ भाव में बृहस्पति अपनी परम शक्तिशाली स्थिति में विराजमान हैं (क्योंकि यह कर्क राशि के समतुल्य है, जो बृहस्पति का उच्च स्थान है)। चतुर्थ भाव माता, मन, सुख एवं वाहन का प्रतीक है। इस स्थिति से आप आजीवन मातृसुख से भरपूर रहेंगे और माता ही आपके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा एवं आशीर्वाद होंगी। आपका मन प्रशांत, स्थिर एवं धर्मभावापन्न होगा। आप सुंदर घर, आरामदायक वाहन एवं सभी प्रकार के सांसारिक सुख के स्वामी होंगे। आपका हृदय अत्यंत उदार एवं दयालु होगा। यह स्थिति इतनी शुभ है कि यह आपके जीवन में अन्य ग्रहों के अनेक अशुभ प्रभावों को भी शांत करने की क्षमता रखती है। आप स्वयं सुखी रहकर दूसरों को भी सुखी करना पसंद करेंगे। पारिवारिक जीवन में आपका आदर्श सबके लिए अनुकरणीय होगा।
शुक्र — मकर (11वाँ भाव)
आपके एकादश भाव में शुक्र ने आपके लाभ एवं मित्रता के जगत् में वसंत का झोंका दिया है। एकादश भाव लाभ एवं मित्रता का स्थान है। इस स्थिति से आपके मित्रों की संख्या प्रचुर होगी और वे अधिकांशतः कलाकार, समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति अथवा धनी घरों के होंगे। मित्रों के माध्यम से आपको विपुल आर्थिक लाभ एवं सुविधाएँ मिलेंगी। आपकी समस्त भौतिक इच्छाएँ बहुत सहजता से पूर्ण होंगी। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मानो लाभ का अंश आपको मिल ही जाएगा। आपका व्यक्तित्व इतना आकर्षक होगा कि आप शत्रु को भी मित्र बना लेने की क्षमता रखते हैं। किंतु इतने मित्रों की भीड़ में सच्चे मित्र को पहचानने में भूल न करें। सब आपके सुख के संगी होंगे, किंतु दुःख के समय कौन साथ रहता है, उस पर भी दृष्टि रखें।
शनि — धनु (10वाँ भाव)
आपके दशम भाव में शनि एक बलदायक स्थिति में विराजमान हैं (कालपुरुष की दशम राशि मकर शनि की अपनी राशि है, और शनि कर्म के कारक हैं)। दशम भाव कर्म का स्थान है। कर्मजीवन के लिए यह एक शुभ स्थिति है। इस स्थिति से आप कार्यक्षेत्र में अत्यंत महत्वाकांक्षी, परिश्रमी एवं सफल होंगे। आप धीरे-धीरे अपने कर्मजीवन के सर्वोच्च शिखर पर पहुँच जाएँगे। आप पर बड़े-बड़े दायित्व आएँगे और आप अपनी योग्यता एवं निष्ठा से उन्हें सफलतापूर्वक पूर्ण करेंगे। आपकी सफलता दीर्घस्थायी एवं गरिमापूर्ण होगी। आप प्रशासन, राजनीति, न्यायपालिका अथवा किसी बड़े संस्थान का नेतृत्व कर सकते हैं। किंतु इस सफलता के मार्ग में आपको प्रचुर बाधा, आलोचना एवं ईर्ष्या का सामना करना पड़ेगा। किंतु उन सबको तुच्छ मानकर आप आगे बढ़ेंगे। स्मरण रखें, 'ऊँचे वृक्ष पर ही आँधी अधिक लगती है'। आपकी सत्यनिष्ठा एवं परिश्रम ही आपकी ढाल है।
राहु — मकर (11वाँ भाव)
आपके एकादश भाव में राहु आपके लाभ एवं मित्रता के जगत् में विपुल सफलता एवं प्रचुरता लेकर आए हैं। यह राहु के लिए अत्यंत शक्तिशाली स्थिति है, जहाँ वे अपनी संपूर्ण मायावी शक्ति प्रकट करते हैं। आपके मित्रों की एक विशाल सेना होगी, किंतु उनमें अधिकांश स्वार्थी एवं अवसरवादी होंगे। उनसे आपको विपुल आर्थिक सहायता एवं लाभ मिलेगा। आपकी इच्छाएँ बहुत सहजता से पूर्ण होंगी और आपको लगेगा कि जो चाहेंगे, वही पाएँगे। आपके लाभ की मात्रा देखकर सब चकित होंगे। किंतु यहीं राहु का सबसे बड़ा फंदा है। इस माया के जगत् में आप अपने सच्चे मित्रों एवं स्वजनों को पहचानना भूल जाएँगे। आपके जीवन का सबसे बड़ा पतन इसी भाव से होगा, यदि आप लोभ पर संयम न रख सकें। सच्चे मित्र एवं सुसंबंध ही जीवन का वास्तविक लाभ है — यह स्मरण रखें।
केतु — कर्क (5वाँ भाव)
आपके पंचम भाव में केतु ने आपकी बुद्धि, संतान एवं प्रेम के जगत् में एक गहन अतींद्रिय चेतना का संचार किया है। आपकी बुद्धि तीक्ष्ण होगी, किंतु वह सांसारिक विषयों की अपेक्षा आध्यात्मिक एवं गुप्त ज्ञान की ओर ही अधिक आकृष्ट होगी। संतान आने में विलंब हो सकता है, अथवा आपकी संतान अत्यंत गंभीर एवं परिपक्व बुद्धि की होगी। प्रेम के क्षेत्र में आप गहराई से जुड़ना चाहें तब भी केतु के प्रभाव से बार-बार वियोग अथवा दूरी आ पड़ेगी। आप जितना भी प्रेम करें, अंत में यही प्रतीत होगा कि सब माया है। यह स्थिति आपको प्रेम एवं संतान की माया से मुक्त कर, एक गहन आध्यात्मिक सत्य की ओर धकेलना चाहती है। यदि आप यह शिक्षा ग्रहण कर सके, तो आपका जीवन सार्थक होगा।

चरण 6 — मांगलिक और कालसर्प दोष

विवाह से पहले सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले दो प्रश्न। रिपोर्ट बताती है कि मंगल किस भाव में है और दोष बनता है या नहीं; कालसर्प देखता है कि सारे ग्रह राहु-केतु के एक ही ओर हैं या नहीं। दोष हो तब भी विवाह का अंतिम विचार दोनों की कुंडली मिलाकर होता है — कुंडली मिलान देखें।

मांगलिक एवं कालसर्प दोष विचार

मांगलिक दोष एवं कालसर्प योग को लेकर अनावश्यक भय की आवश्यकता नहीं। उचित उपाय एवं विचार से यह दोष सहज ही निवारणीय है।
⚠︎ मांगलिक दोष है
लग्न कुंडली में मंगल नवम (9वाँ ) भाव में — यह मांगलिक भाव नहीं है।

चंद्र कुंडली में मंगल आपके चतुर्थ (4वाँ ) भाव में — यह मांगलिक भाव है।
चतुर्थ भाव में मंगल — गृहस्थ जीवन में तनाव, संपत्ति विवाद।

प्रभाव: विवाह में विलंब, दांपत्य कलह एवं संबंध में तनाव की आशंका रहती है। किंतु मांगलिक दोष होने पर मांगलिक वर/वधू से विवाह करने पर दोष परस्पर निरस्त हो जाता है।

उपाय:
• प्रत्येक मंगलवार हनुमान जी की पूजा एवं सुंदरकांड का पाठ
• मंगलवार को उपवास अथवा लाल मसूर दाल का दान
• विवाह से पूर्व कुंभविवाह अथवा विष्णु विवाह संस्कार
• 3 मुखी रुद्राक्ष धारण (मंगल की शांति हेतु)
• मूंगा (Red Coral) रत्न धारण — विशेषज्ञ की सलाह से
✓ कालसर्प योग नहीं
आपके राशि चक्र में कालसर्प योग नहीं है — समस्त ग्रह राहु-केतु अक्ष के बाहर स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। आप इस दोष से पूर्णतः मुक्त हैं।

चरण 7 — कुंडली के योग

ग्रहों के विशेष संयोग — राजयोग, धनयोग, पंच महापुरुष योग आदि। रिपोर्ट केवल वही योग दिखाती है जो इस कुंडली में सचमुच बनते हैं, और यह भी कि कौन से ग्रह मिलकर योग बनाते हैं।

कुंडली के योग

मीन लग्न — ग्रहों की कार्यगत प्रकृति एवं मारक
मुख्य मारक: शनि
ग्रहकार्यगत प्रकृतिस्थितिशक्ति (षड्बल)विशेष भूमिका
सूर्यपापग्यारहवें भावअत्यंत बलवान (7.43)—
चंद्रशुभछठे भावबलवान (7.17)—
मंगलशुभनवें भावबलवान (5.90)—
बुधपापदसवें भावमध्यम (7.57)—
बृहस्पतिसामान्यचौथे भावबलवान (8.56)—
शुक्रपापग्यारहवें भावबलवान (6.62)—
शनिपापदसवें भावमध्यम (5.20)मारक
शास्त्रीय टिप्पणी: मंगल+बृहस्पति का संबंध राजयोगकारक; मंगल मारक नहीं; शनि आदि पापग्रह मारक लक्षण में मारक।
योग का नामप्रकारप्रकृतिग्रहबलविवरण
लक्ष्मी योगधनशुभ✓ बलवाननवमेश मंगल स्वराशि में — नवम भाव में
केमद्रुम दोषदोषअशुभ✓ बलवानचंद्र के दोनों ओर कोई ग्रह नहीं — मानसिक अस्थिरता
मांगलिक दोषदोषअशुभ✓ बलवानमंगल लग्न से नवम एवं चंद्र से चतुर्थ भाव में — विवाह में सावधानी आवश्यक, विस्तार दोष अनुभाग में देखें
भूमि-अर्थ-लाभ योगभावपतिशुभ✓ बलवानदशम भावेश बृहस्पति एवं एकादश भावेश शनि — परस्पर दृष्टि · भूमि, धन एवं वस्तु-प्राप्ति का योग
ऋण-व्यय योगभावपतिअशुभ◐ मध्यमएकादश भावेश शनि एवं द्वादश भावेश शनि — एक ही ग्रह दोनों भावों का स्वामी · ऋण एवं अत्यधिक व्यय की प्रवृत्ति — संचय में सावधानी
वित्तहानि योगभावपतिअशुभ✓ बलवानद्वादश भावेश शनि एवं प्रथम भावेश बृहस्पति — परस्पर दृष्टि · अर्थनाश एवं व्ययाधिक्य — आर्थिक सावधानी
ग्रहबल निर्देशिका: शास्त्रानुसार योगकारक ग्रह बलवान (✓) होने पर शुभ योग पूर्ण फल देता है; दुर्बल (⚠︎) होने पर फल सीमित। अशुभ योग में बलवान ग्रह का अर्थ है अधिक सावधानी। (षड्बल आधारित)

चरण 8 — विंशोत्तरी दशा: फल कब मिलेगा

भाव और योग बताते हैं क्या फल; दशा बताती है कब। विंशोत्तरी दशा का चक्र 120 वर्ष का है, नौ ग्रह क्रम से — केतु 7 · शुक्र 20 · सूर्य 6 · चंद्र 10 · मंगल 7 · राहु 18 · बृहस्पति 16 · शनि 19 · बुध 17 वर्ष। चक्र जन्म नक्षत्र के स्वामी से शुरू होता है, और नक्षत्र का जितना भाग बीत चुका था उस अनुपात में पहली दशा छोटी हो जाती है। हर महादशा में नौ अंतर्दशाएँ होती हैं।

विंशोत्तरी दशा

जन्मकालीन दशा संतुलन: शुक्र दशा के 9.82 वर्ष शेष थे

वर्तमान महादशा: राहु (3.9 / 18.0 वर्ष — 22% पूर्ण)

अंतर्दशा: बृहस्पति (1.24 / 2.40 वर्ष — 52% पूर्ण)

नमूना जातक | जन्म: 15/01/1990 | समय: 10:30 | स्थान: कोलकाताविंशोत्तरी दशाक्र. एवं दशेशआरंभसमाप्तिअवधि1. शुक्र15-01-199011-11-199910व2. सूर्य11-11-199911-11-20056व3. चंद्र11-11-200511-11-201510व4. मंगल11-11-201511-11-20227व5. राहु11-11-202210-11-204018व6. बृहस्पति10-11-204010-11-205616व7. शनि10-11-205611-11-207519व8. बुध11-11-207510-11-209217व9. केतु10-11-209211-11-20997वअंतर्दशा विभाजनशुक्र अंतर्दशाआरंभसमाप्तिबृहस्पति15-01-199010-09-1992शनि10-09-199211-11-1995बुध11-11-199511-09-1998केतु11-09-199811-11-1999सूर्य अंतर्दशाआरंभसमाप्तिसूर्य11-11-199928-02-2000चंद्र28-02-200029-08-2000मंगल29-08-200003-01-2001राहु03-01-200129-11-2001बृहस्पति29-11-200117-09-2002शनि17-09-200230-08-2003बुध30-08-200305-07-2004केतु05-07-200410-11-2004शुक्र10-11-200411-11-2005चंद्र अंतर्दशाआरंभसमाप्तिचंद्र11-11-200511-09-2006मंगल11-09-200612-04-2007राहु12-04-200710-10-2008बृहस्पति10-10-200810-02-2010शनि10-02-201011-09-2011बुध11-09-201110-02-2013केतु10-02-201311-09-2013शुक्र11-09-201312-05-2015सूर्य12-05-201511-11-2015मंगल अंतर्दशाआरंभसमाप्तिमंगल11-11-201508-04-2016राहु08-04-201627-04-2017बृहस्पति27-04-201702-04-2018शनि02-04-201812-05-2019बुध12-05-201908-05-2020केतु08-05-202004-10-2020शुक्र04-10-202005-12-2021सूर्य05-12-202112-04-2022चंद्र12-04-202211-11-2022MyAstrology • डॉ. प्रद्युत आचार्य

चरण 9 — रत्न सुझाव: किस ग्रह का कौन सा रत्न

रिपोर्ट का यह पेज रत्न चुनता है लग्नेश (पहला) और पंचमेश (दूसरा) के आधार पर — पाराशर होराशास्त्र के नियम से, जैसा रिपोर्ट में ही लिखा है। साथ में चल रही दशा के उपाय-मंत्र, रत्न धारण की विधि, और कौन से रत्न कभी एक साथ नहीं पहनने चाहिए।

रत्न वैकल्पिक हैं — पहनने से पहले अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लें। नवरत्न और उनके ग्रहों पर विस्तार से: रत्न।

✦ ग्रह शांति, प्रतिकार एवं रत्न परामर्श ✦
राहु दशा के प्रतिकार
मंत्र एवं स्तोत्र
दुर्गा सप्तशती अथवा काली स्तोत्र | ॐ रां राहवे नमः (१०८ बार)
दान
शनिवार — नीला वस्त्र, काले तिल, सात प्रकार के अन्न एवं नारियल
व्रत एवं सेवा
शनिवार को काली अथवा दुर्गा मंदिर में पूजा करें | विदेशियों की सहायता करें
ग्रह रत्न परामर्श
लग्नेश एवं पंचमेश ग्रह के अनुसार वैदिक पद्धति से चयनित | आयु 36 वर्ष के अनुसार भार
★ लग्नेश रत्न (प्रथम)  —  पुखराज (Yellow Sapphire)
बृहस्पति आपके लग्नेश हैं — देह, स्वास्थ्य एवं व्यक्तित्व के अधिपति। पराशर होराशास्त्र के अनुसार लग्नेश का रत्न सर्वोच्च प्राथमिकता रखता है। किसी भी लग्न का जातक निर्भय होकर यह रत्न धारण कर सकता है।
वजन: 4–6 रत्ती
धातु: सोना
उंगली: तर्जनी (दाहिना हाथ)
दिन: बृहस्पतिवार, सूर्योदय के समय
मंत्र: ॐ बृं बृहस्पतये नमः  (108 बार सूर्योदय पर जप करें)
✓ फल: ज्ञान, धर्म, संतानसुख, आर्थिक समृद्धि
★ पंचमेश रत्न (द्वितीय)  —  मोती (Pearl)
चंद्र आपके पंचमेश हैं — सर्वोत्तम त्रिकोण स्थान। पराशर होराशास्त्र के अनुसार पंचमेश का रत्न संतान, विद्या, बुद्धि एवं पुण्यकर्म की वृद्धि करता है। किसी भी स्थिति में निर्भय होकर धारण किया जा सकता है।
वजन: 10–12 रत्ती
धातु: चांदी
उंगली: तर्जनी अथवा अनामिका (दाहिना हाथ)
दिन: सोमवार, सूर्योदय के समय
मंत्र: ॐ सोमाय नमः  (108 बार सूर्योदय पर जप करें)
✓ फल: मानसिक शांति, मातृसुख, स्मरणशक्ति
निषिद्ध रत्न संयोजन — कभी एक साथ धारण न करें (पराशर होराशास्त्र)
माणिक्य + नीलम  —  सूर्य-शनि परम शत्रु
माणिक्य + हीरा  —  सूर्य-शुक्र शत्रु
मोती + गोमेद  —  चंद्र-राहु चिरविरोधी
पुखराज + पन्ना  —  बृहस्पति-बुध विरोधी
मूंगा + नीलम  —  मंगल-शनि शत्रु
कवच परामर्श
ग्रहों की शुभता-अशुभता एवं दोष के विचार से शास्त्रसम्मत कवच का चयन
✦ बगलामुखी कवच
अधिष्ठातृ देवता: बगलामुखी देवी (दश महाविद्याओं में अष्टम)
चंद्र से गिनने पर मंगल भाव 4 में स्थित हैं — मांगलिक दोष विद्यमान है। इस दोष से विवाह में विलंब, दांपत्य कलह एवं संबंध-विच्छेद होता है। बगलामुखी देवी मंगल की उग्रता शांत करके विवाह की बाधा दूर करती हैं।
धातु: सोना
दिन: मंगलवार अथवा शुक्रवार — पीले वस्त्र में पीले पुष्प के साथ
पूजा की दिशा: उत्तर मुख
बीज मंत्र: ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः
✓ फल: मांगलिक दोष की शांति, विवाह की बाधा का निवारण, शत्रु पर विजय, मुकदमे में विजय, काले जादू से रक्षा
विशेष टिप्पणी: कवच प्राप्त करने से पूर्व अनुभवी पुरोहित या ज्योतिषी के माध्यम से शुभ मुहूर्त में प्राणप्रतिष्ठा करवा लें। हृदय के पास या बाएँ बाँह में धारण करें। कवच पहनते समय स्नान कर स्वच्छ हो लें।
रत्न धारण करने से पूर्व अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श करें।
डॉ. प्रद्युत आचार्य · ☎ +91-93331-22768 · myastrology.in

पूरी रिपोर्ट में और क्या है

ऊपर के हिस्सों के अलावा इस जातक की 78 पेज की रिपोर्ट में है:

इस रिपोर्ट के पीछे का सॉफ़्टवेयर

  • ग्रहों की स्थिति MyAstrology का अपना लिखा VSOP87 ग्रह-सिद्धांत गिनता है — कोई बाहरी सेवा नहीं। अयनांश लाहिड़ी (चित्रपक्ष), राहु-केतु मध्यम पात — दृक सिद्धांत पंचांग की तरह। जन्मस्थान पर जन्म के दिन सचमुच चलने वाली घड़ी (युद्धकालीन समय, ग्रीष्मकालीन समय) ली जाती है।
  • सटीकता मापी जाती है, मानी नहीं जाती: 1950–2050 की 401 तिथियों पर Swiss Ephemeris से, और छपे दृक सिद्धांत पंचांग से अपने-आप मिलाया जाता है। विवरण: Technology।
  • शास्त्रीय नियम: विंशोत्तरी दशा की अवधि ग्रंथ की सारणी से; षड्बल बी. वी. रमन की Graha and Bhava Balas के अनुसार — पुस्तक की उदाहरण-कुंडली की 49 संख्याओं से मिलाकर।
  • तीन शैलियों की कुंडली — पूर्व भारतीय (बांग्ला), उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय — कुंडली, कुंडली मिलान, प्रश्न और वर्षफल में; PDF चुनी हुई शैली में छपती है।
  • इस मुफ़्त रिपोर्ट को कोई AI नहीं लिखता — हर पेज गणना-इंजन और उसके नियमों से बनता है।
  • प्रीमियम रिपोर्ट (वैकल्पिक): गणना बिल्कुल यही; उसके आधार पर Google Gemini व्यक्तिगत विश्लेषण लिखता है — रिपोर्ट में लगभग 10–12 पेज और — और डॉ. प्रद्युत आचार्य हर रिपोर्ट स्वयं पढ़ते हैं और ज़रूरत हो तो सुधार देते हैं। AI लिखने में मदद करता है — ग्रहों की गणना में नहीं। विवरण: पद्धति।

प्रश्नोत्तर

क्या कुंडली का नमूना PDF मिल सकता है?

हाँ। यह पेज एक पूरी PDF रिपोर्ट से लिया गया है, और एक नमूना जातक की पूरी रिपोर्ट "नमूना PDF खोलें" बटन से मुफ़्त देखी जा सकती है। अपनी कुंडली पेज पर मुफ़्त है; पूरी PDF रिपोर्ट सशुल्क है।

जन्म कुंडली कैसे बनती है?

पहले पंचांग और लग्न-सारणी देखकर हाथ से गणना होती थी। अब कुंडली पेज पर जन्म तिथि, समय और स्थान डालते ही कुंडली, ग्रह स्पष्ट, भाव और दशा — सब तुरंत बन जाते हैं, ठीक इस पेज की तरह।

जन्म समय न पता हो तो क्या कुंडली देखी जा सकती है?

पूरी नहीं। लग्न लगभग हर दो घंटे में राशि बदलता है, इसलिए समय के बिना लग्न और भाव तय नहीं होते। चंद्र राशि अक्सर दिन भर एक ही रहती है, पर चंद्रमा दिन में लगभग 13° चलता है, इसलिए नक्षत्र बदल सकता है। जन्म समय न पता हो तो प्रश्न ज्योतिष एक विकल्प है।

क्या यह रिपोर्ट AI लिखता है?

नहीं। मुफ़्त कुंडली और PDF रिपोर्ट पूरी तरह MyAstrology के अपने गणना-इंजन से बनती है। केवल वैकल्पिक प्रीमियम रिपोर्ट का विश्लेषण Google Gemini लिखता है, उसी गणना से — और डॉ. प्रद्युत आचार्य हर रिपोर्ट पढ़ते हैं।

इस नमूने का जातक कौन है?

कोई नहीं — जन्म विवरण काल्पनिक है (15 जनवरी 1990, सुबह 10:30, कोलकाता)। नमूना उसी इंजन से बना है जिससे MyAstrology की हर कुंडली और PDF रिपोर्ट बनती है।

ज्योतिष प्रवृत्तियाँ दिखाता है, निश्चितता नहीं। उपाय वैकल्पिक पारंपरिक अभ्यास हैं — चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं।

अपनी कुंडली बनाएँ — मुफ़्त