कुंडली कैसे पढ़ें — एक नमूना जन्म कुंडली रिपोर्ट, चरण दर चरण
कुंडली देखना सबसे आसानी से सीखा जाता है एक असली रिपोर्ट सामने रखकर। इस पेज पर MyAstrology की एक पूरी कुंडली रिपोर्ट के मुख्य हिस्से हैं, और हर हिस्से से पहले लिखा है कि उसे कैसे पढ़ें।
⚠️ जातक काल्पनिक है — 15 जनवरी 1990, सुबह 10:30, कोलकाता। यह नमूना उसी गणना-इंजन से बना है जिससे MyAstrology की हर कुंडली और PDF रिपोर्ट बनती है — इसलिए आपकी अपनी कुंडली भी ठीक ऐसी ही दिखेगी। इस जातक की पूरी रिपोर्ट 78 पेज की है; यहाँ उसके आठ हिस्से हैं। (नमूना बना: 18 अक्टूबर 2026)
- जन्म विवरण: सबकी नींव
- लग्न, चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र
- लग्न चक्र और नवांश चक्र (जन्म कुंडली)
- ग्रह स्पष्ट (ग्रहों की स्थिति)
- ग्रहों का भाव फल
- मांगलिक और कालसर्प दोष
- कुंडली के योग
- विंशोत्तरी दशा: फल कब मिलेगा
- रत्न सुझाव: किस ग्रह का कौन सा रत्न
- पूरी रिपोर्ट में और क्या है
- इस रिपोर्ट के पीछे का सॉफ़्टवेयर
- प्रश्नोत्तर
चरण 1 — जन्म विवरण: सबकी नींव
कुंडली की पहली शर्त है सही जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान। लग्न औसतन लगभग दो घंटे में एक राशि पार करता है, इसलिए कुछ मिनट की गलती से भी लग्न या भाव बदल सकते हैं। स्थान से अक्षांश-देशांतर मिलते हैं, और उस दिन वहाँ सचमुच चलने वाली घड़ी (टाइम ज़ोन)।
नमूना जातक: 15 जनवरी 1990, सुबह 10:30, कोलकाता।
चरण 2 — लग्न, चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र
हर कुंडली की तीन मूल पहचान —
- लग्न: जन्म के क्षण पूर्वी क्षितिज पर उदित राशि। यही कुंडली का पहला भाव है — इसीलिए जन्म समय इतना ज़रूरी है।
- चंद्र राशि: जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में हो। आम बोलचाल में "मेरी राशि" यही है, और राशिफल व गोचर इसी से पढ़े जाते हैं।
- जन्म नक्षत्र: चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो। विंशोत्तरी दशा यहीं से शुरू होती है, और नामकरण का पहला अक्षर इसी नक्षत्र के चरण से आता है।
चरण 3 — लग्न चक्र और नवांश चक्र (जन्म कुंडली)
यह उत्तर भारतीय कुंडली है। इसमें भाव स्थिर रहते हैं: ऊपर बीच का हीरा हमेशा पहला भाव (लग्न) है, और वहाँ से भाव घड़ी की उल्टी दिशा में चलते हैं — उसके ऊपर-बाएँ का त्रिकोण दूसरा भाव, और इसी तरह आगे। हर भाव में लिखी संख्या वहाँ की राशि है (1 = मेष … 12 = मीन); नमूने में पहले भाव में 12 है, इसलिए लग्न मीन है।
ग्रह के नाम के पास की छोटी संख्या उस नक्षत्र का क्रमांक है जिसमें ग्रह है (अश्विनी 1 … रेवती 27), और छोटा ᴿ चिह्न वक्री ग्रह दिखाता है।
दूसरा चक्र, नवांश (D-9), हर राशि को नौ भागों में बाँटता है; रिपोर्ट में इसका उपयोग विवाह और भाग्य के विचार में होता है। नमूने के नीचे यही कुंडली बाकी दो शैलियों में दी गई है।
एक ही कुंडली, तीन शैलियों में
MyAstrology की कुंडली, कुंडली मिलान, प्रश्न और वर्षफल में कुंडली तीन शैलियों में दिखती है — पूर्व भारतीय (बांग्ला), उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय। पेज पर जो शैली चुनेंगे, PDF भी उसी में छपेगी। ऊपर उत्तर भारतीय है; नीचे उसी जातक का लग्न चक्र बाकी दो शैलियों में:
चरण 4 — ग्रह स्पष्ट (ग्रहों की स्थिति)
कुंडली के पीछे की असली संख्याएँ इस सारणी में हैं: कौन ग्रह किस राशि के कितने अंश पर, किस नक्षत्र के किस चरण में। कुंडली में दो ग्रह एक भाव में दिखें तो वे कितने पास हैं, यह यहीं से पता चलता है। गणना लाहिड़ी अयनांश (निरयन) में।
ग्रहों की स्थिति
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र (पद) | भाव |
|---|---|---|---|---|
| लग्न | मीन | 16°33'46" | उत्तरा भाद्रपद 4था पाद | 1 |
| सूर्य | मकर | 1°03'33" | उत्तराषाढ़ा 2रा पाद | 11 |
| चंद्र | सिंह | 20°07'11" | पूर्वा फाल्गुनी 3रा पाद | 6 |
| मंगल | वृश्चिक | 25°58'48" | ज्येष्ठा 3रा पाद | 9 |
| बुधR | धनु | 17°49'54" | पूर्वाषाढ़ा 2रा पाद | 10 |
| बृहस्पतिR | मिथुन | 9°40'44" | आर्द्रा 1वाँ पाद | 4 |
| शुक्रR | मकर | 7°08'15" | उत्तराषाढ़ा 4था पाद | 11 |
| शनि | धनु | 23°33'31" | पूर्वाषाढ़ा 4था पाद | 10 |
| राहु | मकर | 23°59'03" | धनिष्ठा 1वाँ पाद | 11 |
| केतु | कर्क | 23°59'03" | आश्लेषा 3रा पाद | 5 |
चरण 5 — ग्रहों का भाव फल
कुंडली पढ़ने का मूल काम: कौन ग्रह किस भाव में है और उसका फल क्या है। बारह भावों के मुख्य विषय —
- 1 शरीर, स्वभाव
- 2 धन, परिवार, वाणी
- 3 साहस, भाई-बहन
- 4 माता, घर, सुख
- 5 विद्या, संतान
- 6 शत्रु, ऋण, मुकदमा
- 7 विवाह, साझेदार
- 8 आयु, गुप्त विषय
- 9 भाग्य, धर्म, पिता
- 10 कर्म, पेशा
- 11 लाभ, आय
- 12 व्यय, मोक्ष
नीचे नमूना जातक के हर ग्रह का भाव फल, जैसा रिपोर्ट में छपता है।
ग्रहों का भाव फलादेश
चरण 6 — मांगलिक और कालसर्प दोष
विवाह से पहले सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले दो प्रश्न। रिपोर्ट बताती है कि मंगल किस भाव में है और दोष बनता है या नहीं; कालसर्प देखता है कि सारे ग्रह राहु-केतु के एक ही ओर हैं या नहीं। दोष हो तब भी विवाह का अंतिम विचार दोनों की कुंडली मिलाकर होता है — कुंडली मिलान देखें।
मांगलिक एवं कालसर्प दोष विचार
चंद्र कुंडली में मंगल आपके चतुर्थ (4वाँ ) भाव में — यह मांगलिक भाव है।
चतुर्थ भाव में मंगल — गृहस्थ जीवन में तनाव, संपत्ति विवाद।
प्रभाव: विवाह में विलंब, दांपत्य कलह एवं संबंध में तनाव की आशंका रहती है। किंतु मांगलिक दोष होने पर मांगलिक वर/वधू से विवाह करने पर दोष परस्पर निरस्त हो जाता है।
उपाय:
• प्रत्येक मंगलवार हनुमान जी की पूजा एवं सुंदरकांड का पाठ
• मंगलवार को उपवास अथवा लाल मसूर दाल का दान
• विवाह से पूर्व कुंभविवाह अथवा विष्णु विवाह संस्कार
• 3 मुखी रुद्राक्ष धारण (मंगल की शांति हेतु)
• मूंगा (Red Coral) रत्न धारण — विशेषज्ञ की सलाह से
चरण 7 — कुंडली के योग
ग्रहों के विशेष संयोग — राजयोग, धनयोग, पंच महापुरुष योग आदि। रिपोर्ट केवल वही योग दिखाती है जो इस कुंडली में सचमुच बनते हैं, और यह भी कि कौन से ग्रह मिलकर योग बनाते हैं।
कुंडली के योग
| ग्रह | कार्यगत प्रकृति | स्थिति | शक्ति (षड्बल) | विशेष भूमिका |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | पाप | ग्यारहवें भाव | अत्यंत बलवान (7.43) | — |
| चंद्र | शुभ | छठे भाव | बलवान (7.17) | — |
| मंगल | शुभ | नवें भाव | बलवान (5.90) | — |
| बुध | पाप | दसवें भाव | मध्यम (7.57) | — |
| बृहस्पति | सामान्य | चौथे भाव | बलवान (8.56) | — |
| शुक्र | पाप | ग्यारहवें भाव | बलवान (6.62) | — |
| शनि | पाप | दसवें भाव | मध्यम (5.20) | मारक |
| योग का नाम | प्रकार | प्रकृति | ग्रहबल | विवरण |
|---|---|---|---|---|
| लक्ष्मी योग | धन | शुभ | ✓ बलवान | नवमेश मंगल स्वराशि में — नवम भाव में |
| केमद्रुम दोष | दोष | अशुभ | ✓ बलवान | चंद्र के दोनों ओर कोई ग्रह नहीं — मानसिक अस्थिरता |
| मांगलिक दोष | दोष | अशुभ | ✓ बलवान | मंगल लग्न से नवम एवं चंद्र से चतुर्थ भाव में — विवाह में सावधानी आवश्यक, विस्तार दोष अनुभाग में देखें |
| भूमि-अर्थ-लाभ योग | भावपति | शुभ | ✓ बलवान | दशम भावेश बृहस्पति एवं एकादश भावेश शनि — परस्पर दृष्टि · भूमि, धन एवं वस्तु-प्राप्ति का योग |
| ऋण-व्यय योग | भावपति | अशुभ | ◐ मध्यम | एकादश भावेश शनि एवं द्वादश भावेश शनि — एक ही ग्रह दोनों भावों का स्वामी · ऋण एवं अत्यधिक व्यय की प्रवृत्ति — संचय में सावधानी |
| वित्तहानि योग | भावपति | अशुभ | ✓ बलवान | द्वादश भावेश शनि एवं प्रथम भावेश बृहस्पति — परस्पर दृष्टि · अर्थनाश एवं व्ययाधिक्य — आर्थिक सावधानी |
चरण 8 — विंशोत्तरी दशा: फल कब मिलेगा
भाव और योग बताते हैं क्या फल; दशा बताती है कब। विंशोत्तरी दशा का चक्र 120 वर्ष का है, नौ ग्रह क्रम से — केतु 7 · शुक्र 20 · सूर्य 6 · चंद्र 10 · मंगल 7 · राहु 18 · बृहस्पति 16 · शनि 19 · बुध 17 वर्ष। चक्र जन्म नक्षत्र के स्वामी से शुरू होता है, और नक्षत्र का जितना भाग बीत चुका था उस अनुपात में पहली दशा छोटी हो जाती है। हर महादशा में नौ अंतर्दशाएँ होती हैं।
विंशोत्तरी दशा
जन्मकालीन दशा संतुलन: शुक्र दशा के 9.82 वर्ष शेष थे
वर्तमान महादशा: राहु (3.9 / 18.0 वर्ष — 22% पूर्ण)
अंतर्दशा: बृहस्पति (1.24 / 2.40 वर्ष — 52% पूर्ण)
चरण 9 — रत्न सुझाव: किस ग्रह का कौन सा रत्न
रिपोर्ट का यह पेज रत्न चुनता है लग्नेश (पहला) और पंचमेश (दूसरा) के आधार पर — पाराशर होराशास्त्र के नियम से, जैसा रिपोर्ट में ही लिखा है। साथ में चल रही दशा के उपाय-मंत्र, रत्न धारण की विधि, और कौन से रत्न कभी एक साथ नहीं पहनने चाहिए।
रत्न वैकल्पिक हैं — पहनने से पहले अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लें। नवरत्न और उनके ग्रहों पर विस्तार से: रत्न।
पूरी रिपोर्ट में और क्या है
ऊपर के हिस्सों के अलावा इस जातक की 78 पेज की रिपोर्ट में है:
- ग्रह दृष्टि एवं शत्रु-मित्र
- भाव चलित कुण्डली
- षड्बल (ग्रहों की शक्ति)
- ग्रह युति एवं दृष्टि फलादेश
- शनि की साढ़ेसाती (Sade Sati)
- वर्ग चार्ट विश्लेषण
- गोचर कुंडली (आज की ग्रह स्थिति)
- गोचर फलादेश (जन्म चंद्र राशि से)
- सर्वतोभद्र चक्र
- नवतारा चक्र · षड्नाड़ी चक्र · त्रिपाप चक्र
- K.P. पद्धति — कृष्णमूर्ति नक्षत्र सब-लॉर्ड विश्लेषण
- सामान्य विशेषताएँ
- जैमिनी चर कारक
- नामकरण — जन्म नक्षत्र के अक्षर
- जीवन विश्लेषण
- प्रहर शास्त्रीय विश्लेषण
- दशाफल एवं उपाय
- ग्रह दुर्बलता विश्लेषण
इस रिपोर्ट के पीछे का सॉफ़्टवेयर
- ग्रहों की स्थिति MyAstrology का अपना लिखा VSOP87 ग्रह-सिद्धांत गिनता है — कोई बाहरी सेवा नहीं। अयनांश लाहिड़ी (चित्रपक्ष), राहु-केतु मध्यम पात — दृक सिद्धांत पंचांग की तरह। जन्मस्थान पर जन्म के दिन सचमुच चलने वाली घड़ी (युद्धकालीन समय, ग्रीष्मकालीन समय) ली जाती है।
- सटीकता मापी जाती है, मानी नहीं जाती: 1950–2050 की 401 तिथियों पर Swiss Ephemeris से, और छपे दृक सिद्धांत पंचांग से अपने-आप मिलाया जाता है। विवरण: Technology।
- शास्त्रीय नियम: विंशोत्तरी दशा की अवधि ग्रंथ की सारणी से; षड्बल बी. वी. रमन की Graha and Bhava Balas के अनुसार — पुस्तक की उदाहरण-कुंडली की 49 संख्याओं से मिलाकर।
- तीन शैलियों की कुंडली — पूर्व भारतीय (बांग्ला), उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय — कुंडली, कुंडली मिलान, प्रश्न और वर्षफल में; PDF चुनी हुई शैली में छपती है।
- इस मुफ़्त रिपोर्ट को कोई AI नहीं लिखता — हर पेज गणना-इंजन और उसके नियमों से बनता है।
- प्रीमियम रिपोर्ट (वैकल्पिक): गणना बिल्कुल यही; उसके आधार पर Google Gemini व्यक्तिगत विश्लेषण लिखता है — रिपोर्ट में लगभग 10–12 पेज और — और डॉ. प्रद्युत आचार्य हर रिपोर्ट स्वयं पढ़ते हैं और ज़रूरत हो तो सुधार देते हैं। AI लिखने में मदद करता है — ग्रहों की गणना में नहीं। विवरण: पद्धति।
प्रश्नोत्तर
क्या कुंडली का नमूना PDF मिल सकता है?
हाँ। यह पेज एक पूरी PDF रिपोर्ट से लिया गया है, और एक नमूना जातक की पूरी रिपोर्ट "नमूना PDF खोलें" बटन से मुफ़्त देखी जा सकती है। अपनी कुंडली पेज पर मुफ़्त है; पूरी PDF रिपोर्ट सशुल्क है।
जन्म कुंडली कैसे बनती है?
पहले पंचांग और लग्न-सारणी देखकर हाथ से गणना होती थी। अब कुंडली पेज पर जन्म तिथि, समय और स्थान डालते ही कुंडली, ग्रह स्पष्ट, भाव और दशा — सब तुरंत बन जाते हैं, ठीक इस पेज की तरह।
जन्म समय न पता हो तो क्या कुंडली देखी जा सकती है?
पूरी नहीं। लग्न लगभग हर दो घंटे में राशि बदलता है, इसलिए समय के बिना लग्न और भाव तय नहीं होते। चंद्र राशि अक्सर दिन भर एक ही रहती है, पर चंद्रमा दिन में लगभग 13° चलता है, इसलिए नक्षत्र बदल सकता है। जन्म समय न पता हो तो प्रश्न ज्योतिष एक विकल्प है।
क्या यह रिपोर्ट AI लिखता है?
नहीं। मुफ़्त कुंडली और PDF रिपोर्ट पूरी तरह MyAstrology के अपने गणना-इंजन से बनती है। केवल वैकल्पिक प्रीमियम रिपोर्ट का विश्लेषण Google Gemini लिखता है, उसी गणना से — और डॉ. प्रद्युत आचार्य हर रिपोर्ट पढ़ते हैं।
इस नमूने का जातक कौन है?
कोई नहीं — जन्म विवरण काल्पनिक है (15 जनवरी 1990, सुबह 10:30, कोलकाता)। नमूना उसी इंजन से बना है जिससे MyAstrology की हर कुंडली और PDF रिपोर्ट बनती है।
ज्योतिष प्रवृत्तियाँ दिखाता है, निश्चितता नहीं। उपाय वैकल्पिक पारंपरिक अभ्यास हैं — चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं।