MyAstrology – Dr. Prodyut Acharya, राणाघाट
MyAstrology Dr. Prodyut Acharya
दृक गणित पर आधारित

आज का पंचांग 2026–27

आज का दिन
आश्विन शुक्ल नवमी
20 October 2026 | मंगलवार | हेमंत ऋतु
विक्रम संवत 2083 · श्रवण नक्षत्र
अभी का समय
00:00:00
IST भारतीय समय
गणना का आधारनई दिल्ली, भारत · UTC+5:30
घड़ी और पेज के सभी समय —
सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल, चौघड़िया, अभिजित और लग्न —
तिथि, नक्षत्र, योग और करण —
त्योहार, व्रत और चंद्र मास (नियम) —

चालू पंचांग

तिथि
शु · नवमी
→ दोपहर 12:50:43
नक्षत्र
श्रवण
→ संध्या 6:02:03
योग
शूल ✗
→ कल रात 12:49:46
करण
कौलव
→ दोपहर 12:50:43
चालू लग्न
वृश्चिक
→ सुबह 9:58:03
अगला लग्न
धनु
→ सुबह 9:58:03

आज का शुभ समय, राहुकाल और चौघड़िया

✨ शुभ मुहूर्त एवं योग
✨ अभिजीत मुहूर्त
सुबह 11:43 – दोपहर 12:29
🌟 अमृत काल
सुबह 6:36 – सुबह 8:21
✨ अमृतयोग (दिन)
सुबह 6:29 – सुबह 7:14
सुबह 7:59 – सुबह 11:43
🌙 अमृतयोग (रात्रि)
रात 8:16 – रात 9:07
रात 9:59 – रात 12:32
रात 2:14 – रात 3:56
भोर 5:38 – सुबह 6:30
🌠 माहेंद्रयोग
संध्या 5:43 – रात 8:16
⛔ निषिद्ध काल — इस समय शुभ कार्य नहीं
⛔ सावधानी: शूल योग · गण्ड योग सक्रिय है। सभी शुभ कार्य टालें।
🔴 राहुकाल
अपराह्न 2:56 – अपराह्न 4:22
गुलिक काल
दोपहर 12:06 – दोपहर 1:31
यमगंड
सुबह 9:15 – सुबह 10:41
अन्य क्षेत्रीय विवरण (बंगाल) — वारबेला, कालबेला, कालरात्रि
वारबेला (2)
सुबह 7:53 – सुबह 9:17
कालबेला (6)
दोपहर 1:30 – अपराह्न 2:54
यामार्ध = दिनमान का आठवाँ भाग।
🌑 कालरात्रि (2)
संध्या 7:19 – रात 8:55
चौघड़िया — दिन
रोग
सुबह 6:25 – सुबह 7:50
उद्वेग
सुबह 7:50 – सुबह 9:15
चर
सुबह 9:15 – सुबह 10:41
लाभ
सुबह 10:41 – दोपहर 12:06
अमृत
दोपहर 12:06 – दोपहर 1:31
काल
दोपहर 1:31 – अपराह्न 2:56
शुभ
अपराह्न 2:56 – अपराह्न 4:22
रोग
अपराह्न 4:22 – संध्या 5:47
चौघड़िया — रात
काल
संध्या 5:47 – संध्या 7:22
लाभ
संध्या 7:22 – रात 8:57
उद्वेग
रात 8:57 – रात 10:31
शुभ
रात 10:31 – रात 12:06
अमृत
रात 12:06 – रात 1:41
चर
रात 1:41 – रात 3:16
रोग
रात 3:16 – भोर 4:51
काल
भोर 4:51 – सुबह 6:26
🌟 शूल योग
सुबह 9:17 तक
🌟 गण्ड योग
रात 3:14 तक

आज का विशेष दिन

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आज का
आत्म-समीक्षा
संकल्प
—
अभ्यास
—
आत्म-जिज्ञासा
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दृक गणित (Drik Panchang) — ग्रहों की वास्तविक दृश्य स्थिति से गणना, सूर्यसिद्धांत के प्राचीन गणित से नहीं।

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डॉ. प्रद्युत आचार्य
डॉ. प्रद्युत आचार्य PhD ज्योतिषशास्त्र · SKAVSA स्वर्ण पदक · 15+ वर्षों का अनुभव · लेखक के बारे में
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पार्थ सारथी दास
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"Dr Prodyut Acharya best astrologer and palmist in West Bengal — very nice online consultant, thank you so much sir."
Babita Biswas
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हिंदू पंचांग 2026-27 — पंचांग क्या है और क्यों ज़रूरी है?

तिथि और पक्ष

चांद्र मास के प्रत्येक दिन की तिथि — प्रतिपदा से अमावस्या अथवा पूर्णिमा तक। शुक्लपक्ष एवं कृष्णपक्ष के भेद से उत्सव, पूजा एवं व्रत का शुभ समय निर्धारित होता है।

नक्षत्र

27 नक्षत्रों में चंद्र की स्थिति। अश्विनी से रेवती तक प्रत्येक नक्षत्र कार्य की शुभाशुभता निर्धारित करता है — विवाह, यात्रा, गृहप्रवेश एवं व्यवसाय के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक।

योग और करण

सूर्य एवं चंद्र की सम्मिलित गति से 27 योग बनते हैं। सिद्ध, शुभ, अमृत योग में कार्यारंभ शुभ; विष्कुम्भ, शूल योग में वर्जनीय। करण प्रत्येक अर्ध-तिथि में बदलता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त

आपके शहर के अनुसार सटीक सूर्योदय एवं सूर्यास्त का समय। दिन की अवधि एवं संध्या का समय जानें — पूजा, स्नान एवं धार्मिक अनुष्ठान का सही समय निर्धारित करने में सहायक।

वारबेला और अशुभ समय

बारबेला, कालरात्रि, चंद्रदग्धा एवं योगवर्ज्य — दृक गणित पंचांग के अनुसार प्रत्येक वार के निश्चित अशुभ कालखंड। महत्वपूर्ण कार्य, यात्रा अथवा अनुबंध इस समय टालने चाहिए।

शुभ मुहूर्त

अमृतयोग, माहेंद्रयोग एवं अक्षययोग सहित दिन का श्रेष्ठ समय। विवाह, नए व्यवसाय, गृहप्रवेश एवं यात्रा के लिए तिथि-नक्षत्र-योग मिलाकर सटीक शुभ मुहूर्त।

दृक सिद्धांत के अनुसार पंचांग

यह पंचांग दृक-गणित के अनुसार ग्रह-गणना करके बनाया गया है — सूर्यसिद्धांत के अनुसार नहीं। MyAstrology के अपने गणना-इंजन से बने इस डिजिटल पंचांग में आपके चुने हुए शहर के स्थानीय समय एवं क्षितिज के अनुसार प्रत्येक जानकारी की गणना होती है — भारत, बांग्लादेश अथवा विदेश, आप जहाँ भी हों। 1400 बंगाब्द से 1500 बंगाब्द तक किसी भी तिथि की तिथि, नक्षत्र एवं ग्रह स्थिति देख सकेंगे।

सामान्य प्रश्न

पंचांग क्या है? +
पंचांग का अर्थ है पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण। इन पाँच जानकारियों के समन्वय से किसी भी दिन की शुभाशुभता का विचार किया जाता है।
बांग्ला पंचांग और हिंदी पंचांग में क्या अंतर है? +
बंगाली पंजिका सौर मास से चलती है (बैशाख–चैत्र) — सूर्य की संक्रांति से महीना गिना जाता है। हिंदी पंचांग में महीने चांद्र होते हैं (चैत्र–फाल्गुन), उत्तर भारत में पूर्णिमांत। तिथि-नक्षत्र की गणना दोनों में एक ही है; अंतर महीनों की गिनती और शुभ समय की रीति में है — बंगाल में अमृतयोग, माहेंद्रयोग और वारबेला, हिंदी पंचांग में अमृत काल, राहुकाल और चौघड़िया। यह पंचांग दृक गणित (दृक सिद्धांत) से है — सूर्य सिद्धांत से नहीं।
क्या पिछले वर्ष का पंचांग देखा जा सकता है? +
हाँ। "पुराने वर्ष" टैब में कोई भी बांग्ला वर्ष लिखें अथवा नीचे की सूची से क्लिक करें — 1200 से 2000 बंगाब्द तक सम्पूर्ण पंचांग देख सकेंगे।
मलमास या अधिकमास क्या है? +
प्रत्येक 32-33 माह में एक बार चांद्र एवं सौर वर्ष का अंतर पूरा करने हेतु एक अतिरिक्त मास जुड़ता है — यही मलमास अथवा अधिकमास है। इस मास में विवाह, गृहप्रवेश एवं नया व्यवसाय निषिद्ध है, किंतु दान-पुण्य का अक्षय फल मिलता है।
ध्यान दें: शास्त्रीय गणना के आधार पर निर्मित, आत्मज्ञान के उद्देश्य से। चिकित्सा, विधि अथवा आर्थिक निर्णय में विशेषज्ञ का परामर्श लें।

हिंदू पंचांग सूची — 1200 से 2000 बंगाब्द

801 वर्षों के सम्पूर्ण पंचांग की सूची। किसी भी पुराने अथवा भविष्य के वर्ष का पंचांग देखें।

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