कौशिकी अमावस्या २०२६ & २०२७ कब है?
Kaushiki Amavasya 2027 · दृक सिद्धांत पंचांग के अनुसार तिथि निर्णय
Kaushiki Amavasya 2026 & 2027 kab hai? — tithi, date aur samay
यह पर्व इन नामों से भी जाना और खोजा जाता है — भाद्र अमावस्या, तारापीठ अमावस्या। रोमन हरफ़ में — Kaushiki Amavasya, Bhadra Amavasya, Tarapith Amavasya, Amavasya, Kaushik Amavasya, Kaushiki Amabasya।
कौशिकी अमावस्या २०२७ — तिथि का समय
- अमावस्या आरंभ
- अमावस्या समाप्त
- सूर्योदय
- भोर ५:५८
- सूर्यास्त
- संध्या ६:४६
समय भारतीय मानक समय (IST) में; सूर्योदय-सूर्यास्त नई दिल्ली के। अपने शहर का समय देखने के लिए उस दिन के पंचांग में अपना शहर चुनें।
कौशिकी अमावस्या २०२७ — शुभ और अशुभ मुहूर्त
(समय नई दिल्ली के अनुसार, IST)
✨ शुभ समय
- शुभ चौघड़िया: रात २:४१ – रात ३:१०
- अमृत चौघड़िया: रात ३:१० – भोर ४:३५
नोट: ये समय नई दिल्ली के सूर्योदय (IST) से गणना किए गए हैं और केवल उत्सव की रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक) तिथि के भीतर के हैं। ये सामान्य शुभ-अशुभ समय हैं, पूजा का निश्चित मुहूर्त नहीं। अपने शहर का समय — उस दिन के पंचांग में स्थान बदलें →
कौशिकी अमावस्या — २०२५ से २०३० तक की तारीख़ें
| वर्ष | अंग्रेज़ी तारीख़ | वार | बंगला तारीख़ |
|---|---|---|---|
| २०२५ | 22 अगस्त 2025 | शुक्रवार | ५ भाद्र १४३२ |
| २०२६ | 10 सितंबर 2026 | गुरुवार | २४ भाद्र १४३३ |
| २०२७ | 30 अगस्त 2027 | सोमवार | १३ भाद्र १४३४ |
| २०२८ | 19 अगस्त 2028 | शनिवार | ३ भाद्र १४३५ |
| २०२९ | 7 सितंबर 2029 | शुक्रवार | २१ भाद्र १४३६ |
| २०३० | 28 अगस्त 2030 | बुधवार | ११ भाद्र १४३७ |
तारीख़ें MyAstrology के अपने गणना-इंजन से दृक सिद्धांत द्वारा नई दिल्ली (२८.६१° उ., ७७.२१° पू.) के लिए निकाली गई हैं।
विदेश में रहते हों तो कौशिकी अमावस्या कब?
इस पन्ने की तारीख़ें नई दिल्ली (दृक सिद्धांत) की हैं; पूरे भारत में तारीख़ लगभग सदा यही रहती है। विदेश में अपने सूर्योदय की तिथि से कभी-कभी एक दिन का अंतर हो सकता है।
फिर भी सूर्योदय, तिथि समाप्ति और शुभ मुहूर्त आपके शहर के अनुसार अलग होंगे — देखने के लिए पंचांग में अपना शहर चुनें →
कौशिकी अमावस्या किस तिथि को?
चांद्र श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि। यह तिथि निशीथकाल (मध्यरात्रि) व्यापिनी नियम से निर्धारित होती है।
कौशिकी अमावस्या का महत्व
भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या। तारापीठ में माँ तारा के आविर्भाव की तिथि के रूप में मनाई जाती है; शाक्त और तांत्रिक साधना की विशेष रात्रि।
पूजा विधि और समय
कैसे मनाया जाता है
संध्या के बाद माँ तारा के सामने दीप जलाकर ध्यान और जप करें। लाल जवा, रक्तचंदन और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। अनेक लोग दिन भर उपवास रखकर रात्रि में पूजा करते हैं और निर्धनों को अन्नदान करते हैं।
शुभ समय
अमावस्या तिथि चलते समय रात्रिकाल
मंत्र
सामान्य प्रश्न
कौशिकी अमावस्या २०२७ कब है?
२०२७ में कौशिकी अमावस्या 30 अगस्त 2027, सोमवार, बंगला १३ भाद्र १४३४ को है।
कौशिकी अमावस्या २०२७ की तिथि कब आरंभ और कब समाप्त होती है?
अमावस्या तिथि आरंभ ३१ अगस्त रात २:४१, समाप्त ३१ अगस्त रात ११:११। उस दिन सूर्योदय भोर ५:५८ और सूर्यास्त संध्या ६:४६। समय भारतीय मानक समय (IST) में; सूर्योदय नई दिल्ली का।
कौशिकी अमावस्या की पूजा का शुभ समय कब है?
अमावस्या तिथि चलते समय रात्रिकाल
आने वाले वर्षों में कौशिकी अमावस्या कब है?
२०२५ में 22 अगस्त 2025 (शुक्रवार), २०२६ में 10 सितंबर 2026 (गुरुवार), २०२८ में 19 अगस्त 2028 (शनिवार).
पिछले साल कौशिकी अमावस्या कब था?
10 सितंबर 2026, गुरुवार (बंगला तारीख़ २४ भाद्र १४३३)।
कौशिकी अमावस्या हर साल अलग तारीख़ को क्यों पड़ता है?
कौशिकी अमावस्या अंग्रेज़ी तारीख़ से नहीं, चांद्रमास की तिथि से होता है। चांद्रवर्ष सौरवर्ष से लगभग ११ दिन छोटा है, इसलिए हर साल दिन अंग्रेज़ी कैलेंडर में लगभग ११ दिन आगे आ जाता है। अंतर ज़्यादा बढ़ने पर अधिमास (मलमास) जुड़कर हिसाब मिला देता है — उस वर्ष दिन लगभग एक माह पीछे चला जाता है।