कार्तिक पूजा

कार्तिक पूजा २०२६ कब है?

Kartik Puja 2026 · दृक सिद्धांत पंचांग के अनुसार तिथि निर्णय

Kartik Puja 2026 kab hai? — tithi, date aur samay

२०२६ में कार्तिक पूजा
16 नवंबर 2026, सोमवार
बंगला तारीख़ — ३० कार्तिक १४३३
उस दिन का संपूर्ण पंचांग देखिए →

यह पर्व इन नामों से भी जाना और खोजा जाता है — कार्तिकेय पूजा, कार्तिक लड़ाई। रोमन हरफ़ में — Kartik Puja, Kartikeya Puja, Kartick Puja।

कार्तिक पूजा २०२६ — तिथि का समय

संक्रांति
सूर्योदय
सुबह ६:४४
सूर्यास्त
संध्या ५:२७

समय भारतीय मानक समय (IST) में; सूर्योदय-सूर्यास्त नई दिल्ली के। अपने शहर का समय देखने के लिए उस दिन के पंचांग में अपना शहर चुनें।

कार्तिक पूजा २०२६ — दो पंचांगों में दो तारीख़ें?

दृक सिद्धांत पंचांग
16 नवंबर 2026, सोमवार
सूर्य सिद्धांत पंचांग
17 नवंबर 2026, मंगलवार

पश्चिम बंगाल में प्रचलित कई पंचांग सूर्य सिद्धांत मानता है — ग्रहों की मध्यम गति से। हमारी गणना दृक सिद्धांत मानती है — ग्रहों की वास्तविक दृश्य स्थिति से। इसलिए संक्रांति का क्षण कुछ घंटे अलग होता है, और सौर पर्व का दिन एक दिन खिसक सकता है। इस पृष्ठ की सभी तारीख़ें दृक सिद्धांत के अनुसार हैं। दोनों परंपराएँ पश्चिम बंगाल में प्रचलित हैं — कौन-सी मानें, यह पारिवारिक और स्थानीय रीति की बात है।

दोनों पंचांगों में अंतर क्यों होता है, और ग्रहण का समय सब पंचांगों में एक क्यों रहता है — पूरी व्याख्या पढ़ें (अंग्रेज़ी में)।

कार्तिक पूजा — २०२५ से २०३० तक की तारीख़ें

वर्षअंग्रेज़ी तारीख़वारबंगला तारीख़
२०२५16 नवंबर 2025रविवार३० कार्तिक १४३२
२०२६16 नवंबर 2026सोमवार३० कार्तिक १४३३
२०२७17 नवंबर 2027बुधवार३० कार्तिक १४३४
२०२८16 नवंबर 2028गुरुवार३० कार्तिक १४३५
२०२९16 नवंबर 2029शुक्रवार३० कार्तिक १४३६
२०३०16 नवंबर 2030शनिवार३० कार्तिक १४३७

तारीख़ें MyAstrology के अपने गणना-इंजन से दृक सिद्धांत द्वारा नई दिल्ली (२८.६१° उ., ७७.२१° पू.) के लिए निकाली गई हैं।

विदेश में रहते हों तो कार्तिक पूजा कब?

इस पन्ने की तारीख़ें नई दिल्ली (दृक सिद्धांत) की हैं; पूरे भारत में तारीख़ लगभग सदा यही रहती है। विदेश में अपने सूर्योदय की तिथि से कभी-कभी एक दिन का अंतर हो सकता है।
फिर भी सूर्योदय, तिथि समाप्ति और शुभ मुहूर्त आपके शहर के अनुसार अलग होंगे — देखने के लिए पंचांग में अपना शहर चुनें →

कार्तिक पूजा किस तिथि को?

सौर कार्तिक मास का अंतिम दिन (मासांत) — सूर्य के राशि-संक्रमण का दिन।

कार्तिक पूजा का महत्व

कार्तिक मास का अंतिम दिन — कार्तिक संक्रांति पर देवसेनापति कार्तिकेय की पूजा। शिव-पार्वती के पुत्र, मयूरवाहन कार्तिक की बंगाल के घर-घर में परिवार और संतान के मंगल की कामना से पूजा होती है। कटवा की 'कार्तिक लड़ाई' इस पूजा का सबसे प्रसिद्ध उत्सव है।

पूजा विधि और समय

कैसे मनाया जाता है

संक्रांति की संध्या में मयूरवाहन कार्तिक की मूर्ति या चित्र की फूल, धूप-दीप और नैवेद्य से पूजा करें, फिर प्रणाम-मंत्र का पाठ करें।

शुभ समय

कार्तिक संक्रांति की संध्या और रात्रि

मंत्र

ॐ कार्तिकेय महाभाग दैत्यदर्पनिषूदन। प्रणतोऽहं महाबाहो नमस्ते शिखिवाहन॥

सामान्य प्रश्न

कार्तिक पूजा २०२६ कब है?

२०२६ में कार्तिक पूजा 16 नवंबर 2026, सोमवार, बंगला ३० कार्तिक १४३३ को है।

कार्तिक पूजा २०२६ में संक्रांति कब है?

संक्रांति का क्षण १६ नवंबर संध्या ७:४५। उस दिन सूर्योदय सुबह ६:४४ और सूर्यास्त संध्या ५:२७। समय भारतीय मानक समय (IST) में; सूर्योदय नई दिल्ली का।

कार्तिक पूजा की पूजा का शुभ समय कब है?

कार्तिक संक्रांति की संध्या और रात्रि

आने वाले वर्षों में कार्तिक पूजा कब है?

२०२५ में 16 नवंबर 2025 (रविवार), २०२७ में 17 नवंबर 2027 (बुधवार), २०२८ में 16 नवंबर 2028 (गुरुवार).

पिछले साल कार्तिक पूजा कब था?

16 नवंबर 2025, रविवार (बंगला तारीख़ ३० कार्तिक १४३२)।

कार्तिक पूजा लगभग एक ही अंग्रेज़ी तारीख़ को क्यों पड़ता है?

कार्तिक पूजा सूर्य के राशि-परिवर्तन (संक्रांति) पर निर्भर है, चंद्र की तिथि पर नहीं। सौर हिसाब अंग्रेज़ी कैलेंडर के साथ चलता है, इसलिए तारीख़ साल में एक-दो दिन से ज़्यादा नहीं खिसकती।

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