जगद्धात्री पूजा

जगद्धात्री पूजा २०२६ कब है?

Jagaddhatri Puja 2026 · दृक सिद्धांत पंचांग के अनुसार तिथि निर्णय

Jagaddhatri Puja 2026 kab hai? — tithi, date aur samay

२०२६ में जगद्धात्री पूजा
17 नवंबर 2026, मंगलवार
बंगला तारीख़ — १ अग्रहायण १४३३
अष्टमी — 17 नवंबर 2026, मंगलवार · नवमी — 18 नवंबर 2026, बुधवार
कहीं अष्टमी पूजा प्रधान मानी जाती है, कहीं नवमी पूजा।
उस दिन का संपूर्ण पंचांग देखिए →

यह पर्व इन नामों से भी जाना और खोजा जाता है — जगद्धात्री, चंदननगर जगद्धात्री। रोमन हरफ़ में — Jagaddhatri Puja, Jagadhatri Puja।

जगद्धात्री पूजा २०२६ — तिथि का समय

अष्टमी आरंभ
अष्टमी समाप्त
नवमी आरंभ
नवमी समाप्त
सूर्योदय
सुबह ६:४५
सूर्यास्त
संध्या ५:२७

समय भारतीय मानक समय (IST) में; सूर्योदय-सूर्यास्त नई दिल्ली के। अपने शहर का समय देखने के लिए उस दिन के पंचांग में अपना शहर चुनें।

जगद्धात्री पूजा २०२६ — पूजा का शुभ मुहूर्त और समय

सप्तमी विहित जगद्धात्री पूजा — 16 नवंबर
सूर्योदय – सुबह १०:२०
राहुकाल — 16 नवंबर
सुबह ८:०५ – सुबह ९:२५
अष्टमी विहित जगद्धात्री पूजा — 17 नवंबर
सूर्योदय – सुबह १०:२०
राहुकाल — 17 नवंबर
अपराह्न २:४६ – अपराह्न ४:०७
नवमी विहित जगद्धात्री पूजा — 18 नवंबर
सूर्योदय – सुबह १०:२१
राहुकाल — 18 नवंबर
दोपहर १२:०६ – दोपहर १:२६

पूर्वाह्न = सूर्योदय से दिनमान का पहला तिहाई भाग — नई दिल्ली के सूर्योदय (सूर्य-बिंब का केंद्र) से, IST। राहुकाल अलग से दिया गया है।

“सप्तम्यादिकल्पे अष्टमी विहित श्रीश्री जगद्धात्री पूजा प्रशस्ता” — इस वाक्य का अर्थ

जगद्धात्री पूजा के दिन पंचांग में यह वाक्य लिखा होता है। शब्दशः अर्थ:

पूरे वाक्य का अर्थ: जो सप्तमी से शुरू होने वाली विधि (प्रथम कल्प) से पूजा करते हैं, उनके लिए अष्टमी की पूजा ऊपर दिए अष्टमी के शुभ समय में करना प्रशस्त है। नवमी के दिन पंचांग लिखता है “प्रथम कल्पीय सप्तम्यादि कल्प में नवमी विहित पूजा” — उसी विधि की नवमी पूजा।

उसी दिन पंचांग यह भी लिखता है “द्वितीय कल्पीय रात्रिकाल विहित पूजा” — दूसरी विधि, जिसमें पूजा नवमी की रात को होती है। इसीलिए कहीं अष्टमी की पूजा प्रधान मानी जाती है, कहीं नवमी की — दोनों दिनों के शुभ समय ऊपर दिए गए हैं।

जगद्धात्री पूजा — २०२५ से २०३० तक की तारीख़ें

वर्षअंग्रेज़ी तारीख़वारबंगला तारीख़
२०२५30 अक्टूबर 2025 (अष्टमी)गुरुवार१३ कार्तिक १४३२
२०२५31 अक्टूबर 2025 (नवमी)शुक्रवार१४ कार्तिक १४३२
२०२६17 नवंबर 2026 (अष्टमी)मंगलवार१ अग्रहायण १४३३
२०२६18 नवंबर 2026 (नवमी)बुधवार२ अग्रहायण १४३३
२०२७6 नवंबर 2027 (अष्टमी)शनिवार१९ कार्तिक १४३४
२०२७7 नवंबर 2027 (नवमी)रविवार२० कार्तिक १४३४
२०२८25 अक्टूबर 2028 (अष्टमी)बुधवार८ कार्तिक १४३५
२०२८26 अक्टूबर 2028 (नवमी)गुरुवार९ कार्तिक १४३५
२०२९13 नवंबर 2029 (अष्टमी)मंगलवार२७ कार्तिक १४३६
२०२९14 नवंबर 2029 (नवमी)बुधवार२८ कार्तिक १४३६
२०३०2 नवंबर 2030 (अष्टमी)शनिवार१६ कार्तिक १४३७
२०३०3 नवंबर 2030 (नवमी)रविवार१७ कार्तिक १४३७

तारीख़ें MyAstrology के अपने गणना-इंजन से दृक सिद्धांत द्वारा नई दिल्ली (२८.६१° उ., ७७.२१° पू.) के लिए निकाली गई हैं।

विदेश में रहते हों तो जगद्धात्री पूजा कब?

इस पन्ने की तारीख़ें नई दिल्ली (दृक सिद्धांत) की हैं; पूरे भारत में तारीख़ लगभग सदा यही रहती है। विदेश में अपने सूर्योदय की तिथि से कभी-कभी एक दिन का अंतर हो सकता है।
फिर भी सूर्योदय, तिथि समाप्ति और शुभ मुहूर्त आपके शहर के अनुसार अलग होंगे — देखने के लिए पंचांग में अपना शहर चुनें →

जगद्धात्री पूजा किस तिथि को?

चांद्र कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी और नवमी तिथि। तिथि उदयव्यापिनी नियम से निर्धारित होती है — अर्थात सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो।

जगद्धात्री पूजा का महत्व

कार्तिक शुक्ल अष्टमी — श्रीश्री जगद्धात्री पूजा। दृक सिद्धांत पंचांग के अनुसार: सप्तमी से आरम्भ होने वाली पूजा-परम्परा में अष्टमी को विहित श्रीश्री जगद्धात्री पूजा प्रशस्त है।

पूजा विधि और समय

कैसे मनाया जाता है

जगद्धात्री की मूर्ति स्थापित कर बोधन करें।

शुभ समय

सप्तमी विहित जगद्धात्री पूजा — 16 नवंबर: सूर्योदय – सुबह १०:२०; अष्टमी विहित जगद्धात्री पूजा — 17 नवंबर: सूर्योदय – सुबह १०:२०; नवमी विहित जगद्धात्री पूजा — 18 नवंबर: सूर्योदय – सुबह १०:२१।

मंत्र

ॐ जगद्धात्र्यै नमः।

सामान्य प्रश्न

जगद्धात्री पूजा २०२६ कब है?

२०२६ में जगद्धात्री पूजा 17 नवंबर 2026, मंगलवार, बंगला १ अग्रहायण १४३३ को है। अष्टमी 17 नवंबर 2026, नवमी 18 नवंबर 2026 — कहीं अष्टमी, कहीं नवमी पूजा प्रधान।

जगद्धात्री पूजा २०२६ की तिथि कब आरंभ और कब समाप्त होती है?

अष्टमी तिथि आरंभ १७ नवंबर भोर ४:१९, समाप्त १८ नवंबर सुबह ६:०६। उस दिन सूर्योदय सुबह ६:४५ और सूर्यास्त संध्या ५:२७। समय भारतीय मानक समय (IST) में; सूर्योदय नई दिल्ली का।

जगद्धात्री पूजा की पूजा का शुभ समय कब है?

सप्तमी विहित जगद्धात्री पूजा — 16 नवंबर: सूर्योदय – सुबह १०:२०; अष्टमी विहित जगद्धात्री पूजा — 17 नवंबर: सूर्योदय – सुबह १०:२०; नवमी विहित जगद्धात्री पूजा — 18 नवंबर: सूर्योदय – सुबह १०:२१।

आने वाले वर्षों में जगद्धात्री पूजा कब है?

२०२५ में 30 अक्टूबर 2025 (गुरुवार), २०२५ में 31 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार), २०२६ में 18 नवंबर 2026 (बुधवार).

पिछले साल जगद्धात्री पूजा कब था?

31 अक्टूबर 2025, शुक्रवार (बंगला तारीख़ १४ कार्तिक १४३२)।

जगद्धात्री पूजा हर साल अलग तारीख़ को क्यों पड़ता है?

जगद्धात्री पूजा अंग्रेज़ी तारीख़ से नहीं, चांद्रमास की तिथि से होता है। चांद्रवर्ष सौरवर्ष से लगभग ११ दिन छोटा है, इसलिए हर साल दिन अंग्रेज़ी कैलेंडर में लगभग ११ दिन आगे आ जाता है। अंतर ज़्यादा बढ़ने पर अधिमास (मलमास) जुड़कर हिसाब मिला देता है — उस वर्ष दिन लगभग एक माह पीछे चला जाता है।

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