भूत चतुर्दशी २०२६ कब है?
Bhoot Chaturdashi 2026 · दृक सिद्धांत पंचांग के अनुसार तिथि निर्णय
Bhoot Chaturdashi 2026 kab hai? — tithi, date aur samay
यह पर्व इन नामों से भी जाना और खोजा जाता है — नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली, काली चौदस। रोमन हरफ़ में — Bhoot Chaturdashi, Narak Chaturdashi, Choti Diwali, Kali Chaudas, Naraka Chaturdashi।
भूत चतुर्दशी २०२६ — तिथि का समय
- चतुर्दशी आरंभ
- चतुर्दशी समाप्त
- सूर्योदय
- सुबह ६:३७
- सूर्यास्त
- संध्या ५:३२
समय भारतीय मानक समय (IST) में; सूर्योदय-सूर्यास्त नई दिल्ली के। अपने शहर का समय देखने के लिए उस दिन के पंचांग में अपना शहर चुनें।
भूत चतुर्दशी २०२६ — शुभ और अशुभ मुहूर्त
(समय नई दिल्ली के अनुसार, IST)
✨ शुभ समय
- लाभ चौघड़िया: संध्या ५:३२ – संध्या ७:१०
- शुभ चौघड़िया: रात ८:४९ – रात १०:२७
- अमृत चौघड़िया: रात १०:२७ – रात १२:०५
- अमृत काल: रात ११:१० – रात १२:५१
- लाभ चौघड़िया: भोर ५:०० – सुबह ६:३८
⛔ अशुभ समय
- उद्वेग चौघड़िया: संध्या ७:१० – रात ८:४९
- रोग चौघड़िया: रात १:४३ – रात ३:२२
- काल चौघड़िया: रात ३:२२ – भोर ५:००
नोट: ये समय नई दिल्ली के सूर्योदय (IST) से गणना किए गए हैं और केवल उत्सव की रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक) तिथि के भीतर के हैं। ये सामान्य शुभ-अशुभ समय हैं, पूजा का निश्चित मुहूर्त नहीं। अपने शहर का समय — उस दिन के पंचांग में स्थान बदलें →
भूत चतुर्दशी — २०२५ से २०३० तक की तारीख़ें
| वर्ष | अंग्रेज़ी तारीख़ | वार | बंगला तारीख़ |
|---|---|---|---|
| २०२५ | 19 अक्टूबर 2025 | रविवार | २ कार्तिक १४३२ |
| २०२६ | 7 नवंबर 2026 | शनिवार | २१ कार्तिक १४३३ |
| २०२७ | 28 अक्टूबर 2027 | गुरुवार | १० कार्तिक १४३४ |
| २०२८ | 16 अक्टूबर 2028 | सोमवार | ३० आश्विन १४३५ |
| २०२९ | 4 नवंबर 2029 | रविवार | १८ कार्तिक १४३६ |
| २०३० | 25 अक्टूबर 2030 | शुक्रवार | ८ कार्तिक १४३७ |
तारीख़ें MyAstrology के अपने गणना-इंजन से दृक सिद्धांत द्वारा नई दिल्ली (२८.६१° उ., ७७.२१° पू.) के लिए निकाली गई हैं।
विदेश में रहते हों तो भूत चतुर्दशी कब?
इस पन्ने की तारीख़ें नई दिल्ली (दृक सिद्धांत) की हैं; पूरे भारत में तारीख़ लगभग सदा यही रहती है। विदेश में अपने सूर्योदय की तिथि से कभी-कभी एक दिन का अंतर हो सकता है।
फिर भी सूर्योदय, तिथि समाप्ति और शुभ मुहूर्त आपके शहर के अनुसार अलग होंगे — देखने के लिए पंचांग में अपना शहर चुनें →
भूत चतुर्दशी किस तिथि को?
चांद्र आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि। यह तिथि प्रदोषकाल (सूर्यास्त के बाद) व्यापिनी नियम से निर्धारित होती है।
भूत चतुर्दशी का महत्व
आश्विन कृष्ण चतुर्दशी। मृत पूर्वजों तथा भूत-प्रेतों की आत्माओं हेतु चौदह दीप जलाने की रात्रि। नरकासुर वध का भी स्मरण।
पूजा विधि और समय
कैसे मनाया जाता है
दिन में चौदह प्रकार के साग पकाकर खाएँ — पंडित रघुनंदन के मत से चौदह साग: ओल (सूरन), केऊँ, बेतो, कालकासुंदे, नीम के पत्ते, जयंती, सरसों, मालंच, हेलेंचा, पलता, शुलफा, गुलंच, घेंटू और शुषनी। घर के चारों ओर और मुख्य द्वार पर चौदह मिट्टी के दीप जलाएँ। भोर में तेल लगाकर अभ्यंग स्नान करें।
शुभ समय
रात्रि में चौदह दीप; भोर में अभ्यंग स्नान
मंत्र
सामान्य प्रश्न
भूत चतुर्दशी २०२६ कब है?
२०२६ में भूत चतुर्दशी 7 नवंबर 2026, शनिवार, बंगला २१ कार्तिक १४३३ को है।
भूत चतुर्दशी २०२६ की तिथि कब आरंभ और कब समाप्त होती है?
चतुर्दशी तिथि आरंभ ७ नवंबर सुबह १०:४९, समाप्त ८ नवंबर सुबह ११:२९। उस दिन सूर्योदय सुबह ६:३७ और सूर्यास्त संध्या ५:३२। समय भारतीय मानक समय (IST) में; सूर्योदय नई दिल्ली का।
भूत चतुर्दशी की पूजा का शुभ समय कब है?
रात्रि में चौदह दीप; भोर में अभ्यंग स्नान
आने वाले वर्षों में भूत चतुर्दशी कब है?
२०२५ में 19 अक्टूबर 2025 (रविवार), २०२७ में 28 अक्टूबर 2027 (गुरुवार), २०२८ में 16 अक्टूबर 2028 (सोमवार).
पिछले साल भूत चतुर्दशी कब था?
19 अक्टूबर 2025, रविवार (बंगला तारीख़ २ कार्तिक १४३२)।
भूत चतुर्दशी हर साल अलग तारीख़ को क्यों पड़ता है?
भूत चतुर्दशी अंग्रेज़ी तारीख़ से नहीं, चांद्रमास की तिथि से होता है। चांद्रवर्ष सौरवर्ष से लगभग ११ दिन छोटा है, इसलिए हर साल दिन अंग्रेज़ी कैलेंडर में लगभग ११ दिन आगे आ जाता है। अंतर ज़्यादा बढ़ने पर अधिमास (मलमास) जुड़कर हिसाब मिला देता है — उस वर्ष दिन लगभग एक माह पीछे चला जाता है।