भूत चतुर्दशी

भूत चतुर्दशी २०२६ कब है?

Bhoot Chaturdashi 2026 · दृक सिद्धांत पंचांग के अनुसार तिथि निर्णय

Bhoot Chaturdashi 2026 kab hai? — tithi, date aur samay

२०२६ में भूत चतुर्दशी
7 नवंबर 2026, शनिवार
बंगला तारीख़ — २१ कार्तिक १४३३
उस दिन का संपूर्ण पंचांग देखिए →

यह पर्व इन नामों से भी जाना और खोजा जाता है — नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली, काली चौदस। रोमन हरफ़ में — Bhoot Chaturdashi, Narak Chaturdashi, Choti Diwali, Kali Chaudas, Naraka Chaturdashi।

भूत चतुर्दशी २०२६ — तिथि का समय

चतुर्दशी आरंभ
चतुर्दशी समाप्त
सूर्योदय
सुबह ६:३७
सूर्यास्त
संध्या ५:३२

समय भारतीय मानक समय (IST) में; सूर्योदय-सूर्यास्त नई दिल्ली के। अपने शहर का समय देखने के लिए उस दिन के पंचांग में अपना शहर चुनें।

भूत चतुर्दशी २०२६ — शुभ और अशुभ मुहूर्त

(समय नई दिल्ली के अनुसार, IST)

✨ शुभ समय

⛔ अशुभ समय

नोट: ये समय नई दिल्ली के सूर्योदय (IST) से गणना किए गए हैं और केवल उत्सव की रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक) तिथि के भीतर के हैं। ये सामान्य शुभ-अशुभ समय हैं, पूजा का निश्चित मुहूर्त नहीं। अपने शहर का समय — उस दिन के पंचांग में स्थान बदलें →

भूत चतुर्दशी — २०२५ से २०३० तक की तारीख़ें

वर्षअंग्रेज़ी तारीख़वारबंगला तारीख़
२०२५19 अक्टूबर 2025रविवार२ कार्तिक १४३२
२०२६7 नवंबर 2026शनिवार२१ कार्तिक १४३३
२०२७28 अक्टूबर 2027गुरुवार१० कार्तिक १४३४
२०२८16 अक्टूबर 2028सोमवार३० आश्विन १४३५
२०२९4 नवंबर 2029रविवार१८ कार्तिक १४३६
२०३०25 अक्टूबर 2030शुक्रवार८ कार्तिक १४३७

तारीख़ें MyAstrology के अपने गणना-इंजन से दृक सिद्धांत द्वारा नई दिल्ली (२८.६१° उ., ७७.२१° पू.) के लिए निकाली गई हैं।

विदेश में रहते हों तो भूत चतुर्दशी कब?

इस पन्ने की तारीख़ें नई दिल्ली (दृक सिद्धांत) की हैं; पूरे भारत में तारीख़ लगभग सदा यही रहती है। विदेश में अपने सूर्योदय की तिथि से कभी-कभी एक दिन का अंतर हो सकता है।
फिर भी सूर्योदय, तिथि समाप्ति और शुभ मुहूर्त आपके शहर के अनुसार अलग होंगे — देखने के लिए पंचांग में अपना शहर चुनें →

भूत चतुर्दशी किस तिथि को?

चांद्र आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि। यह तिथि प्रदोषकाल (सूर्यास्त के बाद) व्यापिनी नियम से निर्धारित होती है।

भूत चतुर्दशी का महत्व

आश्विन कृष्ण चतुर्दशी। मृत पूर्वजों तथा भूत-प्रेतों की आत्माओं हेतु चौदह दीप जलाने की रात्रि। नरकासुर वध का भी स्मरण।

पूजा विधि और समय

कैसे मनाया जाता है

दिन में चौदह प्रकार के साग पकाकर खाएँ — पंडित रघुनंदन के मत से चौदह साग: ओल (सूरन), केऊँ, बेतो, कालकासुंदे, नीम के पत्ते, जयंती, सरसों, मालंच, हेलेंचा, पलता, शुलफा, गुलंच, घेंटू और शुषनी। घर के चारों ओर और मुख्य द्वार पर चौदह मिट्टी के दीप जलाएँ। भोर में तेल लगाकर अभ्यंग स्नान करें।

शुभ समय

रात्रि में चौदह दीप; भोर में अभ्यंग स्नान

मंत्र

ॐ श्री कृष्णाय नमः। ॐ यमाय नमः।

सामान्य प्रश्न

भूत चतुर्दशी २०२६ कब है?

२०२६ में भूत चतुर्दशी 7 नवंबर 2026, शनिवार, बंगला २१ कार्तिक १४३३ को है।

भूत चतुर्दशी २०२६ की तिथि कब आरंभ और कब समाप्त होती है?

चतुर्दशी तिथि आरंभ ७ नवंबर सुबह १०:४९, समाप्त ८ नवंबर सुबह ११:२९। उस दिन सूर्योदय सुबह ६:३७ और सूर्यास्त संध्या ५:३२। समय भारतीय मानक समय (IST) में; सूर्योदय नई दिल्ली का।

भूत चतुर्दशी की पूजा का शुभ समय कब है?

रात्रि में चौदह दीप; भोर में अभ्यंग स्नान

आने वाले वर्षों में भूत चतुर्दशी कब है?

२०२५ में 19 अक्टूबर 2025 (रविवार), २०२७ में 28 अक्टूबर 2027 (गुरुवार), २०२८ में 16 अक्टूबर 2028 (सोमवार).

पिछले साल भूत चतुर्दशी कब था?

19 अक्टूबर 2025, रविवार (बंगला तारीख़ २ कार्तिक १४३२)।

भूत चतुर्दशी हर साल अलग तारीख़ को क्यों पड़ता है?

भूत चतुर्दशी अंग्रेज़ी तारीख़ से नहीं, चांद्रमास की तिथि से होता है। चांद्रवर्ष सौरवर्ष से लगभग ११ दिन छोटा है, इसलिए हर साल दिन अंग्रेज़ी कैलेंडर में लगभग ११ दिन आगे आ जाता है। अंतर ज़्यादा बढ़ने पर अधिमास (मलमास) जुड़कर हिसाब मिला देता है — उस वर्ष दिन लगभग एक माह पीछे चला जाता है।

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